सवर्ण-अवर्ण की लड़ाई से समाज को बचाने का समय

25 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। एक तरफ भारत में सवर्ण-अवर्ण के बीच लड़ाई चल रही है, दूसरी तरफ भारत में युवा भी अब लड़ने के लिए तैयार खड़े हैं। अभी तक भारत में आरक्षण की आग बुझाई नहीं जा सकी है कि एक महिला आरक्षण के नाम से नया आरक्षण देश में पैदा कर दिया गया। अब इस नए आरक्षण की आग भी जल्दी ही लगेगी। एक तीसरे भी आरक्षण के बीज बोए गए हैं, वह है युवा आरक्षण। कुछ वर्षों के बाद युवा आरक्षण की भी माँग उठेगी। हमारे सामने जातीय आरक्षण, महिला आरक्षण, युवा आरक्षण और पता नहीं आगे कौन-कौन से आरक्षण की आवाज़ सुनने को मिलेगी और यह गंदी आवाज़ हमारे समाज व्यवस्था को चूर-चूर कर देंगी।

हम लंबे समय से यह सलाह दे रहे हैं कि परिवार में कोई जाति नहीं होती, परिवार के अंदर कोई महिला नहीं होती, कोई युवा और वृद्ध नहीं होता। परिवार एक संयुक्त इकाई होती है। परिवार के अंदर कैसा आरक्षण? यदि किसी को आरक्षण देना है, वह सारा परिवार बैठकर तय करेगा। यदि कोई बीमार है तो उसका इलाज परिवार कराएगा। लेकिन यह नासमझ संवैधानिक व्यवस्था, जो अपनी समस्या हल नहीं कर पा रही है, वह आरक्षण के नाम पर समाज का बँटवारा कर रही है।

हम आरक्षण का विरोध करें, उससे भी अधिक अच्छा है कि परिवार सशक्तीकरण का समर्थन करना चाहिए। यदि परिवार सशक्त होगा, आरक्षण अपने आप खत्म हो जाएगा, क्योंकि आरक्षण राजनेताओं का फूट डालो और राज्य करो का हथियार है और हम हथियार-विहीन हैं। आइए, अब आप सब मिलकर समस्याओं का समाधान करें। सशक्त परिवार अभियान इस दिशा में आगे बढ़े।