मैं बचपन से ही तीन तरह के लोगों से सावधान रहता हूं।
मैं बचपन से ही तीन तरह के लोगों से सावधान रहता हूं। एक है कम्युनिस्ट दूसरे हैं मुसलमान और तीसरे हैं नेहरू परिवार के लोग। लेकिन यदि इन तीनों के संबंध में अलग-अलग सोचा जाए तो मैं तीनों के साथ निकट संबंध रखकर अनुभव कर चुका हूं। मेरे विचार से कम्युनिस्ट की तुलना आप छिपकली से कर सकते हैं उसके कन-कन में जहर घुला है। उसको छूना भी आपके लिए घातक हो सकता है। अगर एक छिपकली कहीं भोजन में पड़ जाए वह कई सौ लोगों को एक साथ मार सकती है लेकिन सामान्य व्यवहार में छिपकली घातक नहीं है क्योंकि वह काटती नहीं है। दूसरी ओर आमतौर पर मुसलमान की तुलना सर्प से कर सकते हैं जिनमें 90% जहरीले नहीं होते 10% सांप ही जहरीले होते हैं। इसलिए 10% की पहचान करने की हमारे अंदर क्षमता होनी चाहिए। यदि हम नेहरू परिवार की तुलना करें तो उस परिवार में अब कोई जहर नहीं है वह तो छिपकली और जहरीले सांप के सुरक्षा में बैठा हुआ है यह आवश्यक है यदि नेहरू परिवार के साथ छेड़छाड़ की जाए तो जहरीले सांप और छिपकली आप पर आक्रमण करने के लिए तैयार बैठे हैं। ऐसी स्थिति में हमें इन तीनों से अलग-अलग स्थिति में अलग-अलग तरीके से सावधानी बरतनी पड़ेगी। हमें साम्यवादियों से निकटता बढ़ाने में बहुत अधिक सतर्कता रखनी चाहिए मुसलमान के साथ संपर्क के मामले में हम थोड़ी लापरवाही भी रख सकते हैं और नेहरू परिवार का तो मौखिक विरोध करना ही पर्याप्त है इससे अधिक सावधानी की अब कोई जरूरत नहीं है। क्योंकि यदि हम साम्यवाद और इस्लामी कट्टरवाद पर नियंत्रण में सफल हो गए तो नेहरू परिवार अपने आप शांत हो जाएगा।
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