सोनिया गांधी की नाराज़गी: ट्रंप, मोदी और नेहरू परिवार की बदलती राजनीति
यह बात धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है कि सोनिया जी ट्रंप से बहुत अधिक नाराज़ हैं। इसका कारण भी बहुत से लोगों को ज्ञात है कि ट्रंप ने सोनिया या राहुल को धोखा दिया है।
नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच पाकिस्तान युद्ध के समय कोई बातचीत हुई थी। कहा जाता है कि वह बात ट्रंप ने नेहरू परिवार को बता दी, और उसके बाद नेहरू परिवार लगातार यह प्रयास करता रहा कि नरेंद्र मोदी जोश में आकर ट्रंप से टकरा जाएँ।
आपको याद होगा कि कई महीनों तक राहुल गांधी रोज़ यह कहते रहे कि नरेंद्र मोदी ट्रंप से डर गए हैं, और नरेंद्र मोदी का 56 इंच का सीना पता नहीं कहाँ चला गया है। इतनी अपमानजनक बातों के बाद भी नरेंद्र मोदी चुप रहे।
इसी कालखंड में ट्रंप और नेहरू परिवार के बीच कोई ऐसा समझौता हुआ, जिसके आधार पर एप्स्टीन फ़ाइल की बात राहुल गांधी को बता दी गई। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि फ़ाइल से जुड़ी जानकारी वास्तव में राहुल गांधी को बताई गई थी, अथवा नरेंद्र मोदी को नुकसान पहुँचाने के लिए एप्स्टीन फ़ाइल में कोई बात जोड़ने की चर्चा हुई थी।
जो भी हुआ हो, इन दोनों घटनाओं के कारण नेहरू परिवार स्वयं को बहुत मज़बूत स्थिति में महसूस कर रहा था। लेकिन परिस्थितियाँ बदल गईं और ट्रंप ने नेहरू परिवार को धोखा दे दिया। ट्रंप ने नरेंद्र मोदी से समझौता कर लिया और राहुल गांधी मानो धरती और आसमान के बीच लटककर रह गए।
यह स्थिति सोनिया गांधी के लिए स्वीकार करना कठिन हो रहा है। दुनिया जानती है कि ट्रंप को अक्सर गंभीर और स्थिर राजनेता नहीं माना जाता; वे किसी को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं और कभी भी अपने रुख से पीछे हट सकते हैं। लेकिन नेहरू परिवार ने ट्रंप पर भरोसा करके जो उम्मीदें बनाई थीं, वे अचानक टूट गईं।
इसी को प्रमुख कारण माना जा रहा है कि आज सोनिया गांधी अपनी चुप्पी तोड़कर ईरान के पक्ष में इतना खुलकर बोल रही हैं।
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