नई समाज व्यवस्था में अंधविश्वास से विज्ञान की ओर
नई समाज व्यवस्था में हम इस बात के लिए समाज में जन-जागरण फैलाएँगे कि भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र आदि का कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। प्रकृति में अनेक ऐसे रहस्य हैं जो अभी तक अनसुलझे हैं। जब वे रहस्य सुलझ जाते हैं, तो हम उन्हें विज्ञान का हिस्सा मान लेते हैं; और जब तक वे सुलझते नहीं, तब तक लोग उन्हें भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र, जादू-टोना आदि विभिन्न नामों से पुकारते रहते हैं। वास्तव में ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे रहस्य अभी भी अनसुलझे हैं।
ऐसी स्थिति में हमें विज्ञान को अधिक महत्व देना चाहिए। लेकिन इसका यह अर्थ भी नहीं है कि जो बातें अभी विज्ञान द्वारा सिद्ध नहीं हुई हैं, किंतु जिन्हें लोग प्रत्यक्ष रूप से अनुभव या देख रहे हैं, उन्हें हम तुरंत झूठ घोषित कर दें।
मेरे विचार से इस विषय में वर्तमान स्थिति काफी हद तक संतुलित है। आज के समय में भूत-प्रेत, तंत्र-मंत्र और जादू-टोने का प्रभाव धीरे-धीरे घट रहा है और निकट भविष्य में यह अपने-आप और कम हो जाएगा। इसके लिए किसी कठोर नियम या कानून बनाने की आवश्यकता नहीं है; जन-जागरण ही पर्याप्त है।
आवश्यकता केवल इस बात की है कि नए-नए शोध किए जाएँ और इस प्रकार के अनसुलझे रहस्यों को समझने और सुलझाने का प्रयास किया जाए। इतना ही पर्याप्त है।
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