वर्ग संघर्ष का मूल कारण और उसकी पहचान

1 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र। कल मैंने लिखा था कि समाज में किस तरह महिला, पुरुष, युवा, वृद्ध, आदिवासी, दलित, सवर्ण का टकराव बढ़ रहा है। आज मैं इसका समाधान लिखूँगा। इस टकराव के बढ़ने का मूल कारण यह है कि हमने व्यवस्था में प्रत्येक वर्ग का एक समूह बना दिया है। इस वर्ग के कुछ लोग बैठकर अपने वर्ग की चिंता करते हैं।

हमने महिलाओं की चिंता करके उसका समाधान खोजने की जिम्मेदारी महिलाओं के एक समूह को दी है। इसी तरह हमने युवाओं का समूह बनाना शुरू कर दिया। आदिवासियों और दलितों के भी इसी तरह समूह बना दिए। ये समूह ही वास्तव में सभी समस्याओं के कारण बन गए हैं।

इसका समाधान सबसे अच्छा यही है कि महिलाओं की समस्याओं का समाधान पुरुषों का समूह करेगा, पुरुषों की समस्याओं का समाधान महिलाओं का समूह सोचेगा। युवाओं की चिंता वृद्ध लोगों का समूह करेगा, वृद्ध लोगों की चिंता युवा करेंगे। इसी तरह दलितों और आदिवासियों की चिंता सवर्णों का समूह करेगा। जिस वर्ग की चिंता है, उसका समूह ठीक विपरीत होगा।

वह समूह उस वर्ग से पूछ सकता है, जानकारी ले सकता है, लेकिन निर्णय वही समूह करेगा, वर्ग नहीं। महिलाओं की चिंता में एक भी महिला उसमें शामिल नहीं होनी चाहिए। आप देखेंगे कि सिर्फ यह एक छोटा सा बदलाव सारे वर्ग-संघर्ष का समाधान कर देगा।

गरीबी कैसे दूर हो, इसका समाधान गरीब नहीं खोज सकते; इसका समाधान अमीरों को ही खोजना चाहिए। अमीरों की क्या समस्याएँ हैं, इसका समाधान गरीब ही खोज सकते हैं, अमीर नहीं। इसलिए मेरा एक छोटा सा सुझाव सारी समस्याओं का समाधान कर देगा। वर्ग-विद्वेष अपने आप समाप्त हो जाएगा।

नई समाज व्यवस्था में हम इस नियम को लागू करेंगे।