मोदी सरकार: नीति, सिद्धांत और वर्तमान राजनीति का टकराव
वर्तमान Narendra Modi की सरकार बहुत सावधान है और फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। यदि हम तीन घटनाओं पर विचार करें—एक यूजीसी का निर्णय, दूसरा महिला आरक्षण का निर्णय, और तीसरा जातीय जनगणना का निर्णय—तो सरकार ये तीनों कार्य कर रही है, जो हमारे अनुसार वास्तव में उचित नहीं हैं।
हम हमेशा आरक्षण का विरोध करते रहे हैं, क्योंकि हमारे विचार में आरक्षण के नाम पर कुछ समूह पूरे समाज पर दबाव बनाते हैं। हम महिला आरक्षण के भी विरुद्ध हैं, क्योंकि हमें लगता है कि इसके माध्यम से कुछ लोग व्यवस्था का दुरुपयोग कर सकते हैं। हम जातीय जनगणना के भी विरोध में हैं, क्योंकि यह जातीय आरक्षण का मार्ग प्रशस्त कर सकती है और समाज को विभाजित कर सकती है।
इन तीनों बातों से असहमति होने के बावजूद, हम वर्तमान स्थिति में नरेंद्र मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि हमारा मानना है कि अभी इन विषयों पर अंतिम और व्यापक निर्णय लेने का समय नहीं आया है। जब संसद में दो-तिहाई बहुमत होगा, तब हम सरकार से इस संबंध में ठोस और संतुलित निर्णय की अपेक्षा करेंगे।
वर्तमान समय में इन मुद्दों पर सरकार का विपक्ष के साथ समझौता करना एक व्यावहारिक और उचित रणनीति है। विपक्ष ने जातीय जनगणना की मांग की—सरकार ने स्वीकार किया; विपक्ष ने महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की—सरकार ने स्वीकार किया; विपक्ष ने यूजीसी से संबंधित मांगें उठाईं—सरकार ने उन्हें भी माना।
मैं इस बात के विरुद्ध हूँ कि बिना व्यापक सहमति के सरकार जल्दबाजी में ऐसे निर्णय लागू करे, जिन्हें बाद में विवाद का कारण बनना पड़े। चाहे आरक्षण 100 वर्षों तक जारी रहे, हम अपने समाज के भीतर उत्पन्न कठिनाइयों को सहन कर लेंगे, लेकिन ऐसी जल्दबाजी नहीं करेंगे जिससे देश-विरोधी ताकतों को लाभ मिले।
स्पष्ट है कि हम जन-जागरण के माध्यम से किसी भी प्रकार के आरक्षण और जातीय जनगणना का विरोध करते रहेंगे, और जब तक व्यापक सहमति नहीं बनती, तब तक सरकार का समर्थन करते रहेंगे।
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