जंतर-मंतर पर कॉकरोच आंदोलन रहा फीका, जुट नहीं सकी अपेक्षित भीड़

 

कई दिनों से दुनिया भर में जंतर-मंतर पर कॉकरोच आंदोलन की प्रतीक्षा हो रही थी। लेकिन आज आंदोलन की अब तक जो जानकारी आ रही है, उसके अनुसार आंदोलन पूरी तरह असफल हुआ है। आंदोलन में जुटने वाले आंदोलनकारियों की संख्या 1000 तक भी नहीं पहुंच सकी। इसका कारण क्या है और इसका परिणाम क्या होगा, यह तो बाद में पता चलेगा। या तो विपक्ष ने इस आंदोलन में मेहनत नहीं की, अन्यथा भारत का विपक्ष यदि मेहनत करता, तो संख्या 25000 तक होना स्वाभाविक था।

बातें तो बहुत लोग कर रहे थे। उद्धव ठाकरे भी इस पर बोल रहे थे, योगेंद्र यादव भी सक्रिय थे, कम्युनिस्ट तो जी-जान से लगे हुए थे, लेकिन जंतर-मंतर पर उपस्थिति अभी नहीं हो सकी। एक कारण यह भी हो सकता है कि इस आंदोलन को दलित आंदोलन के रूप में देखा गया और सवर्णों ने दूरी बना ली। वैसे भी यह आंदोलन मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ जातीय आधार पर ही दिख रहा था।

आज के इस परिणाम से विपक्ष को बहुत निराशा हुई है। वैसे मुझे यह पूरा भरोसा था कि भारत की आम जनता जैन जी के नाम पर किसी आंदोलन से ठगी नहीं जाएगी।