नई व्यवस्था का वैश्विक संदेश: भारत से विश्व तक
5 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। मैं अपने को दुनिया का सबसे अधिक सुखी और संतुष्ट व्यक्ति मान रहा हूँ। मेरी उम्र 87 वर्ष हो गई है। मेरे परिवार में युवा, वृद्ध, महिला, पुरुष, रिश्ते-नाते, सबके साथ मिल-जुलकर अच्छा व्यवहार है। इसका कारण कोई ईश्वरीय कृपा है, ऐसा मैं नहीं मानता। मैं यह मानता हूँ कि हम लोगों ने 70 वर्ष पहले जो पारिवारिक नियम बनाए थे, उन नियमों का ही योगदान है। हम लोगों ने बैठकर यह नियम बनाया था कि चाहे बालक हो या वृद्ध, सभी परिवार में बराबर के सहभागी माने जाएँगे। सब लोग मिलकर तय करेंगे कि वर्क फ्रॉम होम कौन करेगा और बाहर जाकर काम कौन करेगा। यह निर्णय महिला या पुरुष नहीं, बल्कि महिला और पुरुष, युवा और वृद्ध सभी मिलकर करेंगे। हमने एक अति महत्वपूर्ण कार्य किया है कि हमने अपने परिवार में संपत्ति और सेक्स के विवाद को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस मामले में न कोई कानून दखल दे सकता है, न समाज दखल दे सकता है। हम परिवार के लोग बैठकर आपस में जो नियम बनाएँगे, वही नियम हमारे परिवार पर लागू होगा। परिवार का संविधान हम परिवार के लोग बनाते हैं, कोई दूसरा नहीं। इस तरह 60–70 वर्षों के अनुभव के बाद मैं यह कह सकता हूँ कि दुनिया की सारी समस्याओं के समाधान की शुरुआत परिवार सशक्तीकरण है और इसका जीता-जागता उदाहरण हमारा परिवार है।
सामाजिक व्यवस्था में भी हम कुछ नए रिसर्च करके नए निष्कर्ष तक पहुँचे हैं। इस तरह हम दुनिया के सामने वर्तमान लोकतंत्र का एक ऐसा सुधरा हुआ ढाँचा प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, संवैधानिक, सब प्रकार की विकृत व्यवस्था में स्वाभाविक बदलाव दिखेगा। हम किसी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं करेंगे। हम किसी तरह के सत्ता परिवर्तन में विश्वास नहीं रखते। हम तो यह मानते हैं कि हम जिस व्यवस्था का प्रारूप दे रहे हैं, उस प्रारूप के आधार पर सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। हम वर्तमान सरकार के समर्थक नहीं हैं। हम सुशासन के पक्षधर नहीं हैं। हम स्वशासन के पक्षधर हैं। हम लोक स्वराज के पक्षधर हैं। हम नेहरू परिवार, साम्यवादी संस्कृति और मुस्लिम संगठनवाद के गठजोड़ का खुलकर विरोध करते हैं। इस विरोध में हम संघ, गायत्री परिवार, सर्वोदय, आचार्य कुल, आर्य समाज तथा अन्य सभी संस्थाओं के साथ सहयोग लेते और देते हैं, जो नेहरू परिवार, साम्यवादी संस्कृति और मुस्लिम संगठनवाद की तिकड़ी के विरुद्ध हैं। हमारी विचारधारा और कार्यप्रणाली बिल्कुल स्पष्ट है। हम भारत की सफलता के बाद दुनिया को इस लोक स्वराज का संदेश देने की इच्छा रखते हैं।
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