आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति: कारणों की नई खोज
11 अगस्त प्रातः कालीन सत्र। यह बात सही है कि हमारे भारत में आबादी के अनुपात में आत्महत्याओं का प्रतिशत लगातार अधिक बढ़ रहा है और यह आत्महत्या भी हिंदुओं में अधिक हो रही है। इसका कारण खोजने की आवश्यकता है। कहीं-न-कहीं गलती जरूर हो रही है, क्योंकि पिछले 50-60 वर्षों में भौतिक उन्नति भी बहुत तेज हुई है, शिक्षा का विकास भी हुआ है, जागरूकता भी बहुत आई है और आत्महत्या भी बढ़ी है। स्पष्ट है कि कारण कहीं और है। मैं इस विषय पर लंबे समय से सोच पाया हूँ कि आत्महत्याओं का कारण गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा अभाव, गुलामी यह सब कुछ नहीं है। आत्महत्याओं का मुख्य कारण है प्रत्येक व्यक्ति की अपेक्षाएँ बहुत अधिक हो जाना और पूर्ति असंभव हो जाना। हमने अनेक गलतियाँ कीं, जिनके कारण आम लोगों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हो गईं और हम पूरा नहीं कर सके।
यदि इसका समाधान सोचा जाए, इसका मुख्य कारण और समाधान परिवार व्यवस्था में है। परिवार अपने बच्चों के अंदर या अपने सदस्यों से इतनी ज्यादा उम्मीदें बना लेता है कि उन बच्चों के लिए या अन्य सदस्यों के लिए वह उम्मीदें पूरी नहीं हो पातीं और वे निराश होकर आत्महत्या करते हैं। इसमें परिवार के लोगों की भी ज्यादा गलती नहीं है, क्योंकि धर्म और समाज के अभाव में परिवार में समझदारी को घटा रहा है। इसलिए हम दो दिशाओं में मिलकर कार्य कर रहे हैं। पहले परिवार व्यवस्था सशक्त हो, दूसरी परिवार में समझदारी बढ़े। हम अपने बच्चों से किस तरह की उम्मीदें करें, यह निर्णय कोई अन्य नहीं ले सकता। यह निर्णय तो हमें ही लेना पड़ेगा, परिस्थिति अनुसार लेना पड़ेगा, योग्यता के अनुसार लेना पड़ेगा।
इसलिए मैं चाहता हूँ कि हम सशक्त परिवार, सशक्त समाज, आदर्शवादी धर्म की व्यवस्था को मजबूत करें और पूरे समाज में शराफत की जगह समझदारी के लिए प्रशिक्षण दें।
Comments