तानाशाही, विकृत लोकतंत्र और लोकस्वराज पर मेरा दृष्टिकोण
मैं लंबे समय से इस विचार का रहा हूँ कि तानाशाही की तुलना में विकृत लोकतंत्र और विकृत लोकतंत्र की तुलना में लोक स्वराज सबसे अच्छी प्रणाली है। यही कारण है कि मैंने अपने पूरे जीवन में हमेशा पश्चिमी देशों का समर्थन किया तथा साम्यवाद और इस्लामी संगठनवाद का हमेशा विरोध किया। वर्तमान इज़रायल-ईरान टकराव में भी मैंने खुलकर अमेरिका और इज़रायल का साथ दिया है, और मेरी यह लगातार इच्छा रही कि ईरान के राष्ट्रपति को तत्काल हटाया जाना चाहिए। कल वह इच्छा भी पूरी हुई—कल खुमैनी मारे गए। अब नए तरीके से ईरान का इतिहास लिखा जाएगा।
खुमैनी के शासनकाल में जिस तरह लोकतंत्र की धज्जियाँ उड़ाई गईं, वह दुनिया जानती है। मैं इस बात पर विश्वास नहीं करता कि ईरान और इज़रायल ने बल प्रयोग करके कुछ भी गलत किया है, क्योंकि ईरान में जो सरकार चल रही थी वह किसी जनमत के आधार पर नहीं, बल्कि बल प्रयोग के आधार पर चल रही थी। यदि किसी बल प्रयोग के आधार पर चलने वाली सरकार को बल प्रयोग के आधार पर हटा दिया जाए, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। ऐसा ही अमेरिका ने इराक में भी किया था; उस समय भी मैंने अमेरिका का समर्थन किया था।
ईरान के इस मूर्ख राष्ट्रपति को धमकियाँ देने की तुलना में संयुक्त राष्ट्र संघ के मुख्यालय में जाकर बैठ जाना चाहिए था और निवेदन करना चाहिए था कि हम कमजोर हैं, हम लड़ना नहीं चाहते; संयुक्त राष्ट्र संघ जो भी आदेश देगा, हम उसका पालन करेंगे। उसे समर्पण कर देना चाहिए था—शायद दुनिया पिघल गई होती। लेकिन यह मूर्ख अनावश्यक धमकियाँ देता रहा और मारा गया।
अभी भी समय है कि ईरान ताकत के बदले ताकत का प्रयोग करने के बजाय ताकत के सामने झुक जाने की नीति अपनाए। यदि उसके पास अकल नहीं है, तो उसे कम से कम हम लोगों से सलाह लेनी चाहिए।
Comments