नरेंद्र मोदी की रणनीतिक चुप्पी बनाम डोनाल्ड ट्रंप की निरंतर बयानबाज़ी

पूरी दुनिया में दो नेता ऐसे हैं, जिनके विषय में कोई यह अंदाज़ नहीं लगा सकता कि वे क्या निर्णय करेंगे। निर्णय घोषित होने तक दोनों के फैसले गुप्त रहते हैं। इनमें से एक नेता हैं नरेंद्र मोदी और दूसरे हैं अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप।

पूरे कार्यकाल में दुनिया का कोई भी पत्रकार, ज्योतिषी या अन्य भविष्यवक्ता यह कभी अंदाज़ नहीं लगा सका कि वे क्या निर्णय लेंगे। लेकिन इन दोनों में एक बहुत बड़ा फर्क है। नरेंद्र मोदी कुछ बोलते ही नहीं हैं; जब निर्णय घोषित करना होता है, तभी वे कुछ कहते हैं। अन्यथा, वे सबकी सुनते हैं और पूरी तरह चुप रहते हैं।

दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप हैं, जो दिन भर बोलते ही रहते हैं। उन्हें बोलने की बीमारी है। वे अपनी बात हर मिनट में पलटते रहते हैं। उनके बारे में भी अंत तक यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि वे क्या करेंगे और किस बात पर कितनी देर कायम रहेंगे।

दोनों नेताओं के बीच का यह अंतर बहुत बड़ा है, और धीरे-धीरे दुनिया में ट्रंप का लगातार झूठ बोलने के कारण सम्मान गिर रहा है, जबकि दूसरी ओर नरेंद्र मोदी का अधिकतर चुप रहने के कारण सम्मान बढ़ रहा है।

मैं भी नरेंद्र मोदी का पक्षधर हूँ, ट्रंप का नहीं।