समानता और सुविधाओं के नाम पर स्वतंत्रता का अपहरण
कल हम लोगों ने यह चर्चा की थी कि राज्य हमेशा स्वतंत्रता का अपहरण करने के लिए “समानता” शब्द का अधिक प्रयोग करता है। इसके साथ-साथ राज्य यह भी कोशिश करता है कि स्वतंत्रता का अपहरण करने के लिए आम नागरिकों को अधिक से अधिक सुविधाओं का लालच दिया जाए। इन सुविधाओं से राज्य को दो प्रकार से लाभ होता है। एक तरफ आम जनता के बीच स्वतंत्रता की मांग दब जाती है, और दूसरी ओर अधिक सुविधाएँ देने के कारण राज्य को बड़ी मात्रा में भ्रष्टाचार के अवसर भी प्राप्त हो जाते हैं।
यदि आप गंभीरता से देखें, तो आजकल अनेक सरकारें इस बात का घमंड करती हैं कि दस वर्षों में उन्होंने अपना बजट पाँच गुना बढ़ा लिया। स्पष्ट है कि आम जनता से उन्होंने दस वर्षों में ही पाँच गुना टैक्स वसूल कर लिया है, और आगे भी इसी तरह बढ़ाते रहेंगे। क्योंकि जितना अधिक टैक्स वसूला जाएगा, उतनी ही भ्रष्टाचार की मात्रा भी बढ़ेगी, पक्षपात की मात्रा भी बढ़ेगी, और लोगों को सुविधाओं का स्वाद भी लगने लगेगा।
इस प्रकार लोग इन सुविधाओं के लालच में स्वयं ही अपनी स्वतंत्रता का दान कर देते हैं। आप वर्तमान समय में देखिए कि हर पाँच वर्ष में बड़ी संख्या में लोग चुनाव में अपनी इच्छा से जाकर गुलामी पर मोहर लगाकर आते हैं, क्योंकि उन्हें सुविधा चाहिए। ऐसे लोग बहुत कम मिलेंगे जो सुविधा के स्थान पर स्वतंत्रता की मांग करते हों।
हर व्यक्ति नेताओं के सामने हाथ फैलाकर खड़ा है और आम जनता के लिए सुविधाएँ मांग रहा है, क्योंकि यही सुविधाएँ एक ओर आम जनता को खुश रखती हैं और दूसरी ओर भ्रष्टाचार के अवसर भी देती हैं।
मेरे विचार से समय आ गया है कि हम इस संबंध में आम जनता को जागरूक करें। हमें सुविधा नहीं, बल्कि स्वतंत्रता चाहिए।
Comments