भारत की राजनीति में हिंदुत्व और भाजपा का बढ़ता प्रभाव
यह बात पूरी तरह स्थापित हो गई है कि भारत की पहचान हिंदू, संघ और भाजपा के साथ जुड़ गई है। भारत दुनिया का अकेला देश है जहाँ इस तरह राजनीति में हिंदू और हिंदुत्व का महत्व बढ़ रहा है। अभी तीन-चार दिन पहले ही चंडीगढ़ में पंजाब भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पर बमों से आक्रमण किया गया। इस आक्रमण के संबंध में जब गहराई से जाँच-पड़ताल की गई, तो उसका संबंध पाकिस्तान से पाया गया और पाकिस्तान को भी पुर्तगाल तथा जर्मनी के उग्रवादी मदद कर रहे थे।
इस तरह दुनिया के कई देशों के उग्रवादी, पंजाब के कुछ सिखों को अपने साथ जोड़कर भारत में हिंदू, संघ और भाजपा पर आक्रामक हैं। भाजपा को छोड़कर भारत के अधिकांश राजनीतिक दलों का विदेश से भी बहुत अच्छा संबंध है। राहुल गांधी के बारे में तो सारी बातें खुलकर सामने आ चुकी हैं कि उनकी विदेश में कितनी अधिक पहुँच है। अरविंद केजरीवाल के बारे में भी ऐसी बातें सुनी जाती हैं। कुछ मुस्लिम नेताओं का भी विदेश से नज़दीकी संबंध है, लेकिन यह आश्चर्य की बात है कि किस प्रकार विदेशी भारत-विरोधियों के साथ भारत के राजनीतिक दल संबंध रखकर भी संघ के विस्तार को रोक नहीं पा रहे हैं।
यहाँ तक कि कुछ आतंकवादी सिखों ने भी इस विरोध का ठेका उठाया है, लेकिन भारत में संघ, हिंदू और भाजपा लगातार शक्तिशाली होते जा रहे हैं। भारत के लगभग सभी गांधीवादी भी इस विरोध में शामिल हैं। अनेक गांधीवादियों को विदेशों से मदद मिलती है, यह बात स्पष्ट हो चुकी है। फिर भी शत्रुओं के संगठित प्रयास के बाद भी संघ लगातार मज़बूत हो रहा है। इससे यह सिद्ध होता है कि ईश्वर है और कहीं-न-कहीं से संघ को ईश्वरीय मदद भी मिल रही है।
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