न्यायपालिका का विकेंद्रीकरण: नई व्यवस्था की दिशा
29 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र
नई समाज व्यवस्था में न्यायपालिका का भी पूरी तरह विकेंद्रीकरण कर दिया जाएगा। अब तक न्याय करना सिर्फ न्यायालय की जिम्मेदारी है और न्याय बहुत देर से मिल रहा है, आधा-अधूरा मिल रहा है। हम इस कमजोरी को दूर करने के लिए न्यायपालिका का स्वरूप बदल रहे हैं।
नई व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति यदि अपराध करेगा, तो उसकी प्रारंभिक सुनवाई स्थानीय स्तर पर होगी। पाँच लोग बैठकर उस मामले का निपटारा करेंगे। उनमें एक पुलिस का प्रतिनिधि होगा, एक प्रतिनिधि आरोपी का होगा, एक प्रतिनिधि पीड़ित का होगा, एक प्रतिनिधि पीड़ित की ग्राम सभा का होगा और दूसरा प्रतिनिधि आरोपी की ग्राम सभा का होगा।
इस तरह आरोपी का परिवार, पीड़ित का परिवार, दोनों ग्राम सभाएँ और सरकार का प्रतिनिधि अर्थात पुलिस—ये पाँच मिलकर जो निर्णय देंगे, वह निर्णय मान्य होगा। इन पाँचों में से यदि किसी को कोई आपत्ति होगी, तब वह न्यायालय में अपील कर सकता है।
इस तरह न्याय तत्काल होगा, विश्वसनीय होगा, नियम-कानून में ज्यादा नहीं उलझेगा और न्यायपालिका की भूमिका भी बहुत कम हो जाएगी। इस प्रकार हम न्याय को सुलभ बनाएँगे।
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