उत्तराखंड के मोहम्मद दीपक की बदलती कहानी

उत्तराखंड के मोहम्मद दीपक की कहानी कोई बहुत पुरानी नहीं है। लगभग एक वर्ष पहले कुछ कट्टरपंथी हिंदुओं का एक वृद्ध मुसलमान से विवाद हुआ था और उस विवाद में दीपक नाम के एक हिंदू लड़के ने कट्टरपंथी हिंदुओं का खुलकर विरोध किया था। उस समय दीपक की देशभर में प्रशंसा हुई थी।

इस प्रशंसा से उत्साहित होकर दीपक ने अपना नाम “मोहम्मद दीपक” भी रख लिया और साथ में कुछ हिंदुओं के विरुद्ध टिप्पणियां भी शुरू कर दीं। मोहम्मद दीपक को विपक्ष का भी समर्थन मिला और Rahul Gandhi ने भी दीपक को बुलाकर अपने साथ समय बिताया। दीपक का मनोबल बढ़ता चला गया। दीपक देशभर में हुई प्रशंसा से फूले नहीं समा रहे थे।

लेकिन एक वर्ष बीतते-बीतते आज दीपक की यह स्थिति आ गई है कि अब दीपक उत्तराखंड छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उसका सिर्फ एक कारण है कि अब दीपक की दुकान पर ग्राहकों का आना-जाना कम हो गया है। दीपक का व्यापार चौपट हो रहा है। दीपक अपनी दुकान का किराया नहीं दे पा रहे हैं। अब दीपक अपना “मोहम्मद” नाम छोड़ने को भी तैयार हैं, लेकिन वहां का आम हिंदू दीपक को माफ करने के लिए तैयार नहीं है।

मेरे विचार से प्रारंभ में दीपक ने जो किया, वह उचित था, लेकिन बाद में दीपक ने जो किया, वह ठीक नहीं था। दीपक को अपने उचित कार्य का अंतिम परिणाम भी सोच लेना चाहिए था।

आज उत्तराखंड या देश का मुसलमान अथवा विपक्षी दल दीपक की मदद के लिए आगे आने वाले नहीं हैं। यदि हिंदू दीपक का बहिष्कार कर रहा है, तो हिंदुओं की आलोचना भी नहीं की जा सकती।

इसलिए मेरा फिर से सुझाव है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी सीमा समझनी चाहिए।