मां संस्थान का अभियान: समझदारी बढ़े, लोकतंत्र सशक्त बने

15 जुलाई प्रातःकालीन सत्र। माँ संस्थान को इस बात का गौरव है कि दुनिया में अकेला ऐसा संस्थान है, जो समाज में घटती हुई समझदारी को अधिक महत्वपूर्ण कारण मान रहा है और उसके अनुसार समझदार लोगों की संख्या समाज में बढ़नी चाहिए। इस दिशा में संस्थान निरंतर प्रयास भी कर रहा है और सफलता भी मिल रही है।

आप गंभीरता से सोचिए कि जो लोकतंत्र आप भारत में देख रहे हैं, वह कितना रद्दी लोकतंत्र है कि विपक्ष खुलकर कहता है कि उसे सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार है। आप विचार करिए कि भारत में मीडिया खुलकर कहता है कि उसे सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार है।

अरे नासमझो! यह अधिकार अगर विपक्ष को है, मीडिया को है, तो क्या अन्य नागरिक को नहीं है? ऐसा कौन-सा नागरिक है, जिसे सरकार से प्रश्न पूछने का अधिकार नहीं है? फिर यह मूर्ख घमंड करते हैं कि विपक्ष को यह अधिकार है, लोकतंत्र में मीडिया को यह अधिकार है। यह सब उलजलूल बातें हैं।

प्रश्न पूछना और उत्तर देना, ये दोनों हर आदमी के साथ जुड़े हुए हैं। हर आदमी किसी से भी प्रश्न कर सकता है, क्योंकि जिसने उसकी सरकार बनाई है, जिसने उसे वोट दिया है, वह अपनी अमानत के विषय में पूछ भी सकता है। यह सिर्फ विपक्ष और मीडिया की ठेकेदारी नहीं है।

यही कारण है कि हम धीरे-धीरे मीडिया और विपक्ष को भी समझदार बना रहे हैं। हम सबको इस बात का प्रशिक्षण दे रहे हैं कि सिर्फ प्रश्न पूछना ही नहीं, उत्तर देना भी सीखो।