तमिलनाडु के मदुरई में एक पहाड़ी पर एक मंदिर स्थित है और उसी मंदिर से कुछ दूरी पर एक दरगाह भी है।
तमिलनाडु के मदुरई में एक पहाड़ी पर एक मंदिर स्थित है और उसी मंदिर से कुछ दूरी पर एक दरगाह भी है। इस मंदिर और दरगाह के बीच एक टीला है, जहाँ वर्षों से वर्ष में एक दिन मंदिर का दीप जलाया जाता रहा है। उस दीप की रोशनी दरगाह तक पहुँचती थी, जिसे लेकर दरगाह से जुड़े लोगों को आपत्ति थी।
दरगाह के लोगों ने सरकार के साथ मिलकर उस दीप को जलने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन मद्रास उच्च न्यायालय ने दीप जलाने की अनुमति दे दी। इस अनुमति के विरोध में वहाँ की सरकार कानूनी रूप से भी और राजनीतिक रूप से भी खुलकर सामने आ गई। यहाँ तक कि उस निर्णय देने वाले न्यायाधीश को हटाने का भी प्रयास किया गया।
इसके बावजूद मद्रास उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ (डबल बेंच) ने भी हिंदुओं के पक्ष में निर्णय दे दिया। इसके बाद तमिलनाडु सरकार के सामने शर्मनाक स्थिति उत्पन्न हो गई, क्योंकि जिस न्यायाधीश के विरुद्ध वह इतना प्रोपेगेंडा कर रही थी और जिन मुसलमानों को वह प्रोत्साहित कर रही थी, उसी मामले में उच्च न्यायालय की डबल बेंच का निर्णय उसके विपरीत आ गया।
अब तमिलनाडु सरकार को यह समझना चाहिए कि भारत की न्यायपालिका में कम्युनिस्ट और सांप्रदायिक तत्वों की संख्या काफी कम हो चुकी है। अब राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आधार पर भारत में हिंदुओं को दबाना संभव नहीं है। जितनी जल्दी तमिलनाडु सरकार इस सच्चाई को समझ ले, उतना ही उसके लिए अच्छा होगा।
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