आदर्श लोकतंत्र में सत्ता पक्ष या विपक्ष का कोई स्थायी अस्तित्व नहीं होता।
आदर्श लोकतंत्र में सत्ता पक्ष या विपक्ष का कोई स्थायी अस्तित्व नहीं होता। सभी लोग परिस्थिति के अनुसार कभी सत्ता पक्ष के साथ हो सकते हैं, तो कभी विपक्ष के साथ। किसी व्यक्ति या समूह की कोई स्थिर पहचान अनिवार्य नहीं होती।
लेकिन वर्तमान भारत में जो प्रदूषित लोकतंत्र है, उसमें विपक्ष का होना आवश्यक माना गया है। आज के भारत में विपक्ष के रूप में राहुल गांधी जैसे अपेक्षाकृत शरीफ व्यक्ति को स्थापित किया गया है, लेकिन राहुल गांधी का दुरुपयोग ट्रंप भी करना चाहते हैं, प्रियंका भी करना चाहती हैं और ममता बनर्जी भी करना चाहती हैं। सभी राहुल गांधी का स्थान लेने के लिए व्याकुल दिखाई देते हैं।
अब यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि भारतीय राजनीति में प्रियंका गांधी और ममता बनर्जी का आगे बढ़ना, राहुल गांधी की तुलना में कई गुना अधिक खतरनाक है, क्योंकि ये दोनों चालाक हैं, जबकि राहुल गांधी चालाक नहीं हैं। फिर भी निकट भविष्य में राहुल गांधी का पतन लगभग निश्चित दिखाई देता है।
ऐसी स्थिति में यह प्रश्न खड़ा होता है कि भारत को सुरक्षित रहने के लिए क्या करना चाहिए। इस विषय पर हम दो अलग-अलग दिशाओं में विचार कर रहे हैं।
पहली दिशा यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष की धारणा को समाप्त कर, निर्दलीय लोकतंत्र को एक आवश्यकता के रूप में प्रसारित किया जाए।
दूसरी दिशा यह है कि वर्तमान परिस्थितियों में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और ममता बनर्जी—इन तीनों से अलग हटकर—एक नए विपक्ष की कल्पना की जाए, जो भूतकाल के विपक्ष से मुक्त हो और देश को एक नया, सशक्त और लोकतांत्रिक विपक्ष प्रदान कर सके।
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