महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार की एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पवार की एक हवाई जहाज़ दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस दुखद घटना के तुरंत बाद ही बेशर्म राजनीति शुरू हो गई। अभी तक पार्थिव शरीर का दाह-संस्कार भी नहीं हुआ था कि राजनेताओं ने गंदी और अमर्यादित भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया।
विपक्ष के लगभग सभी नेताओं ने एक स्वर में इस दुर्घटना में षड्यंत्र की गंध खोजनी शुरू कर दी और मांग करने लगे कि सुप्रीम कोर्ट के नेतृत्व में इसकी जांच कराई जाए। दूसरी ओर, पूरी ताकत से यह प्रचार किया जा रहा है कि यह सब गंदी राजनीति है।
लेकिन इतिहास गवाह है कि यदि ऐसी ही कोई दुर्घटना 11 वर्ष पहले हुई होती, तो वर्तमान सत्ता पक्ष उस समय विपक्ष में रहते हुए बिल्कुल इसी प्रकार की आवाज़ उठाता। सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों की यह दलगत राजनीति हमें क्या सिखा रही है? हमें किस दिशा में ले जा रही है? और इस गंदगी से हमारा पीछा आखिर कब छूटेगा—यह गंभीर चिंता का विषय है।
मैं लगातार इस विचार को सामने रखता रहा हूँ कि दलगत राजनीति समाप्त होनी चाहिए। संसद में जो भी लोग जाएँ, वे स्वतंत्र होकर जाएँ, स्वतंत्र विचार रखें—गुलाम नहीं, पशु नहीं, बल्कि मनुष्य बनकर जाएँ। लेकिन राजनेताओं को दलगत राजनीति में इतना आनंद आने लगा है कि वे इस गंदगी में भी इत्र की खुशबू महसूस करने लगे हैं, जैसा कि आज और कल स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
एक ओर एक राजनेता की लाश श्मशान जाने की प्रतीक्षा कर रही है और दूसरी ओर राजनेता गंदगी उछालने का खेल खेल रहे हैं। अब समय आ गया है कि पूरे भारत में निर्दलीय लोकतंत्र की आवाज़ को मज़बूती से उठाया जाए।
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