वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा बलपूर्वक नियंत्रण कर लिया जाना एक गंभीर घटना है।
वेनेजुएला पर अमेरिका द्वारा बलपूर्वक नियंत्रण कर लिया जाना एक गंभीर घटना है। यह घटना पूरी दुनिया को, और विशेष रूप से भारत को, क्या संदेश देती है—यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दुनिया जानती है कि वेनेजुएला के पास विशाल और समृद्ध तेल भंडार हैं, लेकिन वहाँ की सरकार उस तेल का दोहन नहीं कर पा रही थी। इसका मुख्य कारण यह था कि बड़े उद्योगपतियों को इस क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा रहा था, जबकि छोटे उद्योगपति इतनी क्षमता नहीं रखते कि वे तेल निकाल सकें। साथ ही, वेनेजुएला सरकार के पास भी वह उच्च तकनीक उपलब्ध नहीं थी, जिससे तेल का प्रभावी रूप से उत्पादन किया जा सके।
यही प्रकार की मूर्खता भारत भी लंबे समय तक करता रहा है। “जल, जंगल, ज़मीन बचाओ” के नाम पर बड़े-बड़े उद्योगपतियों को कोयला और अन्य खनिज संसाधनों के दोहन से लगातार रोका गया। यदि बड़े उद्योगपतियों को रोका जाएगा और भविष्य में अमेरिका या कोई अन्य शक्तिशाली देश इन संसाधनों के लालच में हम पर कब्ज़ा कर लेगा, तो यह विरोध करने वाले तथाकथित जल-जंगल-ज़मीन के संरक्षक केवल गालियाँ ही देते रह जाएंगे।
वेनेजुएला की घटना भारत को यह स्पष्ट संदेश देती है कि हमें विदेशी आयात बढ़ाने के बजाय स्वदेशी उत्पादन बढ़ाना चाहिए। इसके लिए बड़े उद्योगपतियों को आमंत्रित करना आवश्यक है—चाहे वे भारतीय हों या विदेशी।
जो लोग जल, जंगल और ज़मीन के नाम पर बड़े उद्योगपतियों का इस प्रकार विरोध कर रहे हैं, वे या तो वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो जैसी मूर्खता कर रहे हैं, या फिर जानबूझकर धूर्तता। यही गलती वेनेजुएला की सरकार ने की थी, जिसका परिणाम आज पूरी दुनिया देख रही है।
जो कार्य सामान्य लोग या छोटे उद्योग नहीं कर सकते, उसके लिए अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को आगे बढ़कर बुलाना ही होगा। इसके लिए उन्हें रोकने के बजाय उनके लिए अनुकूल वातावरण और स्वागत की व्यवस्था करनी होगी।
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