नई समाज व्यवस्था में व्यभिचार और बलात्कार का पुनर्परिभाषण
6 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र: नई समाज व्यवस्था पर चर्चा।
हम भारत से नई समाज व्यवस्था की चर्चा की शुरुआत कर रहे हैं। इस व्यवस्था में व्यभिचार और बलात्कार को अलग-अलग किया जाएगा। बलात्कार को एक अपराध माना जाएगा, क्योंकि बलात्कार में बल प्रयोग या धोखाधड़ी अनिवार्य होते हैं। व्यभिचार को अनैतिक माना जाएगा, क्योंकि व्यभिचार में कोई अपराध नहीं होता, केवल अनैतिक कार्य होता है।
अनैतिक कार्यों को रोकना सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। इसलिए हम नई व्यवस्था में यह घोषणा करेंगे कि व्यभिचार रोकने में सरकार की कोई भूमिका नहीं होगी। व्यभिचार रोकना या तो समाज का कार्य है या धर्म का कार्य है। सरकार इस प्रकार के अपने सारे कानून हटा ले, जिनके आधार पर व्यभिचार को अपराध घोषित किया गया है।
व्यभिचार को अपराध घोषित कर देने के कारण ही बलात्कारों की बाढ़ आ गई है। पुराने जमाने में व्यभिचार और बलात्कार अलग-अलग होते थे, लेकिन मुसलमानों की गुलामी और ईसाइयों के शासन के अंतर्गत व्यभिचार को भी अपराध माना जाने लगा। अब इसे सुधारने की जरूरत है।
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