. बस्तर से बंगाल तक : अपराध, कानून और शासन पर सवाल

पिछले दो-तीन दिनों के अखबारों और टीवी पर मैंने दो प्रकार के अलग-अलग समाचार सुने। पहले प्रकार के समाचार में यह था कि छत्तीसगढ़ के बस्तर में 15 वर्ष पहले 76 सैनिक मारे गए थे, लेकिन उन सभी आरोपियों को न्यायालय से निर्दोष घोषित कर दिया गया। जबकि कहा जाता है कि वे सभी किसी गिरोह के सदस्य थे। इस बात की गंभीर विवेचना होनी चाहिए कि गलती पुलिस व्यवस्था में है या हमारी न्यायिक प्रक्रिया में।

इसी के साथ यह भी समाचार था कि बंगाल में नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री के पीए की कुछ पेशेवर अपराधियों ने हत्या कर दी। अभी-अभी एल्विश यादव से 10 करोड़ रुपये की फिरौती माँगी गई है। इस प्रकार पूरे देशभर में पेशेवर अपराधियों का आज भी जाल बिछा हुआ है। आज भी आपको ऐसे लोग मिल जाएँगे जो ठेके लेकर अपराध करते हैं। न न्यायालय उन्हें दंड दे पाता है और न ही पुलिस उनका कुछ बिगाड़ पाती है।

दूसरी ओर, एक अलग प्रकार के समाचार पढ़ने को मिले कि हमारी सरकार होटल में छापा मारकर आपसी सहमति से देह व्यापार करने वालों को जेल में बंद कर रही है। हमारी सरकार गांजा के उपयोग को भी बहुत कड़ाई से रोक रही है। हमारी सरकार सट्टा बाजार भी नहीं होने देगी।

मैं गंभीरतापूर्वक सोच रहा हूँ कि सरकार की प्राथमिकताएँ क्या हैं। एक तरफ पेशेवर अपराधी अपनी आपराधिक दुकान धड़ल्ले से चला रहे हैं और दूसरी ओर हमारी नाटकबाज़ सरकार देह व्यापार, गांजा के व्यापार और सट्टा बाजार को रोकने में लगी हुई है।

अब सरकार बदल गई है और हमें अपनी सरकार से इस प्रश्न का उत्तर चाहिए। हमने नाटकबाज़ पिछली सरकार को कूड़ेदान में फेंक दिया है और अब आपसे उम्मीद कर रहे हैं कि आप नाटकबाज़ी छोड़कर वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देंगे।