अंबाला की घटना से नई परिवार व्यवस्था की आवश्यकता

24 में प्रातःकालीन सत्र

हरियाणा के अंबाला शहर के पास बिचपड़ी गांव में एक परिवार के एक साधारण विवाद में गोली चल गई। परिवार के बीच किसी जमीन की मिट्टी बेचे जाने पर विवाद चल रहा था। एक छोटे बेटे को पैसे की अधिक जरूरत थी और परिवार उस मिट्टी का पैसा उस बच्चे को नहीं देना चाहता था। बच्चे ने गोली चला दी। 95 वर्ष की बुजुर्ग दादी की मृत्यु हो गई और दो-तीन लोग घायल हैं। बच्चा अपनी गलती मानने को भी तैयार नहीं है।

प्रश्न उठता है कि उस बच्चे को क्या करना चाहिए था। हमारी व्यवस्था इस संबंध में किस तरह की है? परिवार व्यवस्था क्या है? गांव व्यवस्था क्या है?

यह बात जगजाहिर है कि परिवार का कोई संविधान बना हुआ नहीं था। परिवार का कोई मुखिया नहीं था। परिवार के किसी सदस्य को यदि आपत्ति है, तो उसे अपनी शिकायत करने का कोई माध्यम नहीं था। बच्चा पिस्टल रखे हुए था, उस पर भी कभी परिवार में कोई आपत्ति नहीं की गई। क्या यह हमारी परिवार व्यवस्था में गलती नहीं है कि हम कोई व्यवस्था बनाए बिना एक अव्यवस्थित तरीके से परिवार चला रहे हैं? यदि ऐसा होगा तो दुर्घटनाएं होंगी ही।

हम लोगों ने जो नई परिवार व्यवस्था का प्रारूप दिया है, उसमें इस प्रकार की कोई घटना कभी होगी ही नहीं, क्योंकि हमारी नई व्यवस्था में परिवार का एक सर्वसम्मत संविधान होगा। संपत्ति सामूहिक होगी, व्यक्तिगत नहीं। परिवार का एक मुखिया होगा और मुखिया का निर्णय सब लोग मानेंगे। यदि किसी को कोई आपत्ति होगी, तो वह परिवार प्रमुख के पास अपील कर सकता है। यदि परिवार प्रमुख की बात भी गलत है, तो वह ग्राम सभा में भी अपील कर सकता है। परिवार का कोई सदस्य परिवार की सहमति के बिना पिस्टल रख ही नहीं सकता।

इस तरह जब आप परिवार में व्यवस्था बना लेंगे, तो इस प्रकार की घटनाएं कभी होंगी ही नहीं। इसीलिए हम लोग एक नई परिवार व्यवस्था का समाज के सामने प्रारूप प्रस्तुत कर रहे हैं और इस प्रकार के झगड़ों के समाधान के लिए यह परिवार प्रणाली अच्छी है।