मेरे दशकों पुराने विचारों और वर्तमान सरकारी नीति का आश्चर्यजनक साम्य
31 May 26 00:05
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मेरे दशकों पुराने विचारों और वर्तमान सरकारी नीति का आश्चर्यजनक साम्य
मैंने कुछ दिन पहले ही यह लिखा था कि भारत सरकार पूरी तरह इस आधार पर कार्य कर रही है जिस तरह की बातें मैंने 30-40 वर्ष पहले अपने विचारों में लिखी थीं। उस समय मैंने लिखा था कि यह निश्चित नहीं है कि सरकार मेरी बातें पढ़कर उस दिशा में कार्य कर रही है अथवा सरकार के स्वयं के रिसर्च के परिणाम वैसे ही आ रहे हैं। दोनों में से कोई भी बात हो सकती है।
लेकिन कल सरकार ने यह घोषित किया कि भारत की सीमाओं के 15 किलोमीटर के अंदर आने वाले क्षेत्र को विशेष क्षेत्र माना जाएगा और वहाँ बनाए गए किसी भी अवैध ढाँचे को गिरा दिया जाएगा। मुझे बहुत आश्चर्य हुआ कि यह बात मैं भी 30-40 वर्ष पहले अपने प्रस्तावित संविधान के क्रमांक 128 पर लिख चुका हूँ और हूबहू इसी तरह लिखी है। मैंने भी 15 किलोमीटर का क्षेत्र रिजर्व घोषित किया है और वर्तमान सरकार ने भी 15 किलोमीटर ही भूमि निश्चित की है।
इससे मुझे विश्वास होता है कि अवश्य ही सरकार के कुछ लोग मेरी लिखी हुई बातों को पढ़ते या विचार करते होंगे। मुझे अपने लिखे पर गर्व होता है। मुझे यह विश्वास हो गया है कि सरकार बिल्कुल ठीक दिशा में आगे बढ़ रही है।
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