सुप्रीम कोर्ट की मुहर और चुनाव आयोग की बढ़ती विश्वसनीयता
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयुक्त के पद के संबंध में एक नया इतिहास बना लिया है। इसके पहले चुनाव आयोग के लिए सिर्फ टी. एन. सेशन को ही याद किया जाता था, लेकिन ऐसा लगता है कि ज्ञानेश कुमार ने सेशन का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है।
कल सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात पर मुहर लगा दी कि चुनाव आयोग सही है और चुनाव आयोग की आलोचना अनावश्यक होती रही है। कल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद जिस तरह योगेंद्र यादव ने अपना चेहरा बनाया था, वह देखकर दया आ जाती थी। योगेंद्र यादव ने राहुल गांधी के मार्गदर्शन में चुनाव आयोग के खिलाफ बहुत मेहनत की थी और कल के निर्णय के बाद सबसे अधिक दुखी बेचारे योगेंद्र यादव ही दिख रहे थे।
टी. एन. सेशन की परिस्थितियाँ अलग थीं और ज्ञानेश कुमार की अलग रही हैं। सेशन के समय सुप्रीम कोर्ट भी सेशन के साथ था, जबकि ज्ञानेश कुमार को सुप्रीम कोर्ट का समर्थन नहीं मिला। सेशन के समय विपक्ष पूरा सेशन के साथ था, लेकिन ज्ञानेश कुमार को विपक्ष का पूरा विरोध झेलना पड़ा।
जिस तरह बेचारे पर व्यक्तिगत आक्रमण हुआ, उन सबको देखकर ऐसा महसूस होता है कि ज्ञानेश कुमार की जगह कोई और रहा होता तो शायद हिम्मत छोड़ देता और भाग जाता। लेकिन ज्ञानेश कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर विपक्षी नेताओं तक के विरोध के सामने जितनी हिम्मत दिखाई, उस हिम्मत को याद करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
किस तरह ममता बनर्जी चुनाव आयोग के कार्यालय में जाकर गुंडागर्दी कर रही थीं, किस तरह राहुल गांधी अपने को चुनाव आयुक्त से भी बड़ा संवैधानिक पद बताकर अकड़ रहे थे, वह सारी घटनाएँ इतिहास में दर्ज हैं। आज तक किसी चुनाव आयुक्त पर इस तरह व्यक्तिगत रूप से आक्रमण नहीं किया गया, जिस तरह और जितना नीचे उतरकर विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के साथ व्यवहार किया।
लेकिन आज यह कहा जा सकता है कि ज्ञानेश कुमार ने हिम्मत दिखाई। ज्ञानेश कुमार की ही हिम्मत का परिणाम है कि आज विदेशी मुसलमानों को भगाने का एक आरामदायक मार्ग समाज को मिल गया है।
हम ज्ञानेश कुमार की कोई मदद नहीं कर सके, लेकिन हम आज एकजुट होकर ज्ञानेश कुमार को धन्यवाद दे सकते हैं।
Comments