नई समाज व्यवस्था में राज्य की सीमित भूमिका
30 में प्रातःकालीन सत्र
हम वर्तमान में समाज और राज्य के बीच जिस तरह का संबंध है, इस संबंध को पूरी तरह बदल देंगे। वर्तमान समय में राज्य समाज का मालिक बन गया है और राज्य समाज को आदेश देता है। हम इसको उलट देंगे।
समाज सरकार को यह आदेश देगा कि हमें तुमसे कुछ भी नहीं चाहिए, हमें अपने हाल पर छोड़ दो। अर्थात सारे निर्णय सामाजिक व्यवस्था करेगी। राज्य व्यवस्था समाज की आंतरिक व्यवस्था में किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
हम अपने तरीके से जिएंगे, मरेंगे; वह तरीका हम तय करेंगे, राज्य तय नहीं कर सकता। राज्य का केवल एक काम होगा कि हमारे मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी दे। अर्थात समाज सब कुछ कर सकता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति उद्दंडता करता है, कोई अपराध करता है, तो समाज उस व्यक्ति को दंडित नहीं करेगा। उस व्यक्ति को दंडित करने की जिम्मेदारी राज्य की होगी।
इतनी गारंटी के अतिरिक्त राज्य को कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हम नई व्यवस्था के अंतर्गत राज्य की तुलना में समाज को मालिक मानेंगे। राज्य समाज का मैनेजर होगा। सिर्फ व्यक्ति की उद्दंडता से सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी होगी, अन्य कोई कार्य नहीं।
जब तक समाज राज्य को कोई और जिम्मेदारी न दे, तब तक राज्य मनमानी नहीं करेगा। हम इस तरह की नई व्यवस्था बनाएंगे।
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