डीजल-पेट्रोल की लाइनों का असली कारण: दोहरी मूल्य व्यवस्था और कालाबाजारी
भारत सरकार लगातार कह रही है कि डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। हम पेट्रोल पंपों को उतना डीजल-पेट्रोल दे रहे हैं, जितना उन्हें पिछले वर्ष भी दिया गया था। उसमें कोई कमी नहीं आई है। यह बात सच है।
दूसरी ओर यह बात भी सच है कि डीजल और पेट्रोल के लिए पेट्रोल पंपों पर लाइन लगी हुई है। उपभोक्ताओं को पर्याप्त डीजल-पेट्रोल नहीं मिल रहा है। डीजल-पेट्रोल की साफ कमी दिख रही है।
तीसरी बात यह भी सच है कि डीजल-पेट्रोल की खपत पहले की तुलना में बढ़ी नहीं है, कुछ कम जरूर हुई है। और यह बात साफ दिखती है कि बिजली की मांग बढ़ी है।
ये तीनों बातें एक साथ सच हैं। मैंने इस संबंध में पता किया, तो तीनों ही बातें सच हैं। फिर कारण क्या है कि डीजल-पेट्रोल की लाइन लगी हुई है?
मेरे विचार से उसका एक ही कारण है—सरकार की गलत नीतियां। सरकार ने डीजल-पेट्रोल के दो तरह के भाव तय कर दिए हैं, एक बड़े उपभोक्ताओं के लिए अलग और छोटे उपभोक्ताओं के लिए अलग। इन दोनों रेटों में लगभग ₹35 का अंतर है।
स्वाभाविक है कि बड़े उपभोक्ता ब्लैक में डीजल-पेट्रोल खरीद रहे हैं और छोटे उपभोक्ता अधिक से अधिक डीजल-पेट्रोल लेकर बड़े उपभोक्ताओं को ब्लैक में बेच रहे हैं। यही ब्लैक सारी समस्याओं की जड़ है।
यदि भारत सरकार ने मेरी बात मान ली होती और डीजल-पेट्रोल का रेट बढ़ा दिया होता, तो किसी प्रकार की कोई समस्या पैदा नहीं होती।
यही समस्या भविष्य में बिजली के लिए भी आने वाली है। यदि सरकार ने तत्काल बिजली के रेट नहीं बढ़ाए, तो फिर इसी तरह बिजली के लिए भी लाइन लगेगी। बाजार में दो तरह का मूल्य होना बहुत घातक है।
सरकार को अपनी नीतियां बदलनी चाहिए। सरकार डीजल-पेट्रोल और बिजली की मूल्य-वृद्धि कर दे, सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
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