समाज में फैलती भ्रामक जानकारी पर चिंता
भारत में आप देख रहे हैं कि सत्य की जानकारी लोगों तक सही रूप में नहीं पहुँच पा रही है। कोई साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता, धर्मगुरु, राजनेता, मीडिया कर्मी, टीवी चैनल, अखबार अथवा फेसबुक-व्हाट्सऐप पर लिखने वाला व्यक्ति किसी न किसी पक्ष में खड़ा होकर झूठी या अधूरी जानकारी प्रस्तुत कर रहा है। इस कारण समाज के लोगों के लिए सत्य और असत्य की पहचान करना कठिन हो गया है। यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सी घटना सही बताई जा रही है और कौन-सी गलत।
हम सभी लोगों ने मिलकर इस कमी को दूर करने की पहल की है। भारत में आपको फेसबुक, व्हाट्सऐप अथवा किसी अन्य माध्यम से हमारे संस्थान की ओर से जो भी जानकारी दी जाएगी, उसकी सत्यता की पूरी जिम्मेदारी हमारी होगी। अब तक दी गई जानकारियों में आप खोजकर बता दीजिए कि कौन-सी जानकारी असत्य थी, क्योंकि हम लोग गहन खोजबीन और जांच-पड़ताल के बाद ही समाज के सामने कोई जानकारी प्रस्तुत करते हैं। अधूरी जानकारी को हम छिपा लेते हैं अथवा प्रस्तुत नहीं करते, जब तक हमें पूर्ण विश्वास न हो जाए या घटना पूरी तरह स्पष्ट न हो जाए।
समाज में असत्य को निरुत्साहित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। इसलिए मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी को आप पूरी तरह सत्य मान सकते हैं। हम भविष्य में भी अपना यह स्तर बनाए रखेंगे। वैचारिक स्तर पर हम समाज-सहायक गतिविधियों के पक्ष में खड़े रहते हैं और समाज-तोड़क गतिविधियों के विरुद्ध विचार रखते हैं, लेकिन घटनाओं के आधार पर हम किसी प्रकार का पक्षपात नहीं करते।
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