जनसंख्या परिवर्तन: प्रकृति का समाधान या नई चुनौती

इतिहास बताता है कि प्रकृति बहुत-सी समस्याओं का स्वयं समाधान करती है और राजनेता इस प्रकार के समाधानों का श्रेय अपने साथ जोड़ने का प्रयास करते हैं। ऐसा पहले भी हमेशा होता रहा है और अब भी हो रहा है। भारत की जनसंख्या के संबंध में भी यही बात साफ हो रही है। भारत की जनसंख्या में एक बहुत बड़ा उलटफेर होने जा रहा है। अब तक भारत में जनसंख्या का बढ़ना एक बहुत बड़ी समस्या माना जाता था, जबकि मैं इस समस्या को बहुत अधिक गंभीर नहीं मानता था। यद्यपि यह समस्या थी, लेकिन जितना हल्ला किया जा रहा था, उतनी बड़ी नहीं। अब जनसंख्या घटने का समाचार आने लगा है। यह बात साफ हो गई है कि आगामी 10 वर्षों में जनसंख्या का पूरा ढांचा बदल जाएगा। वर्तमान में जो 2047 को आधार मानकर विकास की संरचना सरकार बना रही है, वह गलत सिद्ध हो जाएगी। जमीनों के दाम घटना शुरू हो जाएंगे, मकान किराया घट जाएगा, सड़कों पर भीड़ भी कम दिखने लग जाएगी, युवाओं की आबादी कम हो जाएगी और वृद्ध लोगों की जनसंख्या बहुत बढ़ जाएगी। और भी कई तरह के बदलाव होंगे, जो अभी भविष्य में आने बाकी हैं।

राजनेताओं ने इसका लाभ उठाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। आंध्र के मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कर दी है कि जिन परिवारों के दो से अधिक बच्चे होंगे, उन महिलाओं को 30000 से 40000 रुपए तक इनाम दिया जाएगा। देश की अन्य प्रदेश सरकार भी आबादी के इस बदलाव से सावधान दिख रही हैं। वैसे भी इस समय भारत की जनसंख्या कम होने वाली है, क्योंकि विदेशी मुसलमान भी भगाए जा रहे हैं और भारत में भी मुसलमानों की जनसंख्या पर लगातार नजर रखी जा रही है। ऐसे वातावरण में मेरी यह सलाह है कि जनसंख्या घटना को भी एक बहुत बड़ी समस्या के रूप में प्रचारित करना ठीक नहीं है।

प्रकृति अपना काम करती है, कर रही है और परिस्थितियों के अनुसार नीतियों में बदलाव किया जा सकता है। वैसे तो सरकार रोबोट को भी जनसंख्या का एक अच्छा समाधान सोच रही है, परंतु मेरा एक सुझाव है कि वर्तमान भारत में 60 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को वृद्ध घोषित किया जाता है। अब इसे 70 वर्ष कर देना चाहिए, जिससे मानसिक बदलाव संभव है।