परीक्षा नहीं, व्यवस्था जिम्मेदार: भ्रष्टाचार पर एक वैकल्पिक दृष्टिकोण

आजकल परीक्षाओं में नकल और भ्रष्टाचार की चर्चा बहुत हो रही है। मैं भी मानता हूँ कि परीक्षाओं में नकल और भ्रष्टाचार बहुत होता है। सच बात यह है कि परीक्षाएँ होती ही इसलिए हैं कि भ्रष्टाचारी लोग नकल कर सकें और उससे अपनी कमाई कर सकें, क्योंकि भारत की अधिकांश राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था ऊपर से नीचे तक भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। केवल वर्तमान सरकार ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था ही भ्रष्टाचार से प्रभावित है।

इसलिए यदि हम नकल और भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहते हैं, तो हमें परीक्षाओं का महत्व कम कर देना चाहिए। क्या आवश्यकता है कि वर्तमान समय में नीट जैसी परीक्षाएँ आयोजित की जाएँ? परीक्षाओं का निजीकरण कर दीजिए। जिस संस्था को किसी की नियुक्ति करनी होगी, वह संस्था अपने तरीके से परीक्षा ले लेगी। यह ठेकेदारी सरकार को करने की क्या आवश्यकता है?

अभी दो-तीन वर्ष पहले ही स्कूलों में भी परीक्षाएँ बंद कर दी गई थीं, लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था की दुकानदारी पर प्रभाव पड़ने लगा, इसलिए परीक्षा प्रणाली का स्वरूप बदल दिया गया। हम नई व्यवस्था में सभी प्रकार की परीक्षाओं का निजीकरण कर देंगे। सरकार की ओर से केवल सरकारी नियुक्तियों के लिए ही परीक्षा का प्रावधान होगा।

मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश शुल्क को भी स्वतंत्र कर दिया जाएगा। सरकार कोई नियंत्रण नहीं करेगी। इससे सारा भ्रष्टाचार अपने आप समाप्त हो जाएगा।

जिस प्रकार वर्तमान समय में देशभर के तिलचट्टे स्वतंत्रता मिलते ही एकाएक मर गए, उसी प्रकार परीक्षा प्रणाली को समाप्त करते ही सारा भ्रष्टाचार अपने आप रुक जाएगा।

व्यवस्था बदलिए। सरकारी हस्तक्षेप कम कीजिए और अधिकतम निजीकरण कीजिए।