नई समाज व्यवस्था में योग का व्यापक पुनर्परिभाषण
21 जून प्रातःकालीन सत्र
आज योग दिवस है। योग दिवस के दिन हम नई समाज व्यवस्था में योग को और अधिक महत्वपूर्ण स्थान देंगे। हम अष्टांग योग को महत्वपूर्ण मानते हैं। वर्तमान जो योग पद्धति है, यह शारीरिक शुद्धि के लिए बहुत अच्छी है। इससे बीमारियाँ कम होती हैं, लेकिन इसमें मानसिक शुद्धि और आत्मिक शुद्धि का समावेश नहीं है।
जबकि योग मानसिक शुद्धि से शुरू होता है, शारीरिक शुद्धि उसके बाद होती है और उसके बाद आत्मिक शुद्धि तक इसका समापन होता है। लेकिन वर्तमान योग शारीरिक शुद्धि तक सीमित हो गया है। यद्यपि यह कार्य अच्छा है, बुरा नहीं है, लेकिन इसे योग का नाम न देकर यदि कोई और नाम दिया जाता तो अधिक अच्छा होता।
योग का तो सीधा अर्थ है मानसिक शुद्धि, उसके बाद शारीरिक शुद्धि और उसके बाद आत्मिक शुद्धि। हम योग शब्द को इन तीनों शुद्धियों के साथ जोड़कर स्थापित करेंगे और वर्तमान योग पद्धति का कोई अलग नामकरण करेंगे, जिससे भ्रम न पैदा हो।
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