राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: चोरी ट्रस्ट की, राजनीति किसकी?
अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में बहुत बड़े पैसे का गोलमाल हुआ धन की चोरी हुई यह बात लगभग सिद्ध हो चुकी है । चोरी की जांच भी चल रही है चोर भी पकड़े जाएंगे और सजा भी मिलेगी । इस प्रश्न के बाद भी यह चर्चा आवश्यक हो जाती है या चोरी किसकी हुई और चोरी से प्रभावित कौन है इस चोरी के प्रकरण से कौन लाभ उठाना चाहता है यह सब मुद्दे महत्वपूर्ण है। राम मंदिर में जो चोरी हुई वह दान के पैसे की हुई चंदे की नहीं भीख की नहीं स्पष्ट है कि दान दानदाताओं ने मंदिर को दिया था ट्रस्ट को दिया था और दान के पैसे पर ना उनका कोई अधिकार बनता है और ना वह अपना अधिकार बता रहे हैं। कोई भी दानदाता इस विषय पर प्रश्न नहीं उठा रहा है क्योंकि दानदाता जानता है कि दान देने के बाद वह प्राप्तकर्ता का अधिकार बन जाता है अर्थात ट्रस्ट ही उसका मालिक है। साफ है कि चोरी ट्रस्ट की हुई है दानदाताओं की नहीं। चोर ट्रस्ट पकड़ेगा जो चोर से मिलेगा वह ट्रस्ट में जाएगा इसमें सरकार का भी कोई लेना-देना नहीं। लेकिन एक प्रश्न यह उठना है कि इस चोरी पर चिल्लाने वाले कौन हैं। चिल्लाने वाले यदि दानदाता भी होते तो हम चुप रह सकते थे अगर दान नहीं देने वाले भी इस प्रकरण में कुछ बोले तो हमें सिर झुकाना पड़ेगा लेकिन जिन लोगों ने मंदिर का विरोध किया जिन लोगों ने दानदाताओं को दान देने से रोका वे लोग इस प्रकरण पर यदि चिल्ला रहे हैं तो वे लोग नीचे स्तर के लोग हैं गंदे लोग हैं बहिष्कार करने लायक लोग हैं। यदि ट्रस्ट को कोई घाव हो गया है मक्खियों को बैठने की इजाजत देना उचित नहीं है उसके लिए तो यही उचित है कि घाव की दवा की जाए उछल-कूद करने वाली मक्खियों को मार देने की जरूरत है क्योंकि उनका उद्देश्य घाव को ठीक करना नहीं है घाव को बढ़ाना है। मैं इस विषय पर खुलकर चर्चा के लिए तैयार हूं कि योगी सरकार ठीक दिशा में काम कर रही है मंदिर ट्रस्ट के संबंध में भी कानून के अनुसार निर्णय हो रहा है।
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