राम मंदिर चोरी प्रकरण से मिले महत्वपूर्ण सबक

मैंने कुछ दिन पहले अयोध्या राम मंदिर में चोरी संबंधी जो एक लेख लिखा था, वह अब पूरी तरह सत्य सिद्ध हुआ है। जांच पूरी हो गई है। अपराधी भी पकड़े गए हैं। यह भी सिद्ध हुआ है कि इस प्रकरण में किसी तरह का घोटाला अब तक सामने नहीं आया है। कुछ लोगों ने चोरियां की हैं और वह चोरी अब पकड़ी गई है। ऐसे लोग जेल में भी चले गए हैं।

अब तक के प्रमाण के आधार पर संघ और संघ परिवार पूरी तरह विश्वसनीय सिद्ध हुआ है क्योंकि संघ परिवार के विश्वसनीय साथी चंपत राय अब तक किसी संदेह के दायरे में नहीं आए। यह अवश्य है कि चंपत राय अपने साथियों से धोखा खा गए। यह उनकी एक कमजोरी मानी जा सकती है, लेकिन अब तक अन्य कोई प्रमाण नहीं आया है।

यह भी सिद्ध हुआ कि इस मामले में जो लोग पकड़े गए हैं, उस विश्वासघात में आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं और यह सिद्ध हुआ है कि इस तरह के मामलों में ब्राह्मण अधिक विश्वसनीय होते हैं, ऐसा कोई आधार नहीं है। किसी भी जाति के लोग इस तरह की चोरी या धोखे में शामिल हो सकते हैं, इसलिए किसी भी जन्मना जाति को अपनी श्रेष्ठता का घमंड नहीं करना चाहिए।

विपक्ष ने मक्खियों के समान इस घटना का भरपूर दुरुपयोग करने का प्रयास किया, लेकिन वह प्रयास भी असफल सिद्ध हुआ है क्योंकि सारी ताकत लगाने के बाद भी न राम मंदिर में जाने वाले भक्तों की संख्या घटी है, न ही दान में कोई कमी आई है।

यह सिद्ध करता है कि धर्म की अपेक्षा राजनीति अधिक भ्रष्ट है, अधिक अविश्वसनीय है और संघ परिवार इस बड़ी दुर्घटना से साफ बचकर निकल गया। यह मुझे पूरा विश्वास था और जांच-पड़ताल के बाद यह बात प्रमाणिक भी हो गई है। साथ ही यह विश्वास भी मजबूत हुआ है कि राम के साथ धोखा करने वालों को देर-सबेर दंडित होना ही पड़ेगा।