परिवार से विश्व तक संविधान की परिकल्पना: विश्व शांति और सुरक्षा की दिशा में एक पहल

2 जुलाई प्रातःकालीन सत्र। हम यदि पूरी दुनिया का ठीक से आकलन करें तो विश्व युद्ध का खतरा दुनिया की सबसे बड़ी चिंता मानी जाती है। इसी तरह के युद्ध के डर से दुनिया भर के देश शक्ति संग्रह करते हैं, एटम बम बनाते हैं, इतनी बड़ी-बड़ी सेनाएँ रखते हैं। यदि विश्व युद्ध या अन्य किसी युद्ध का खतरा टल जाए तो दुनिया को बहुत सुविधा हो सकती है। इस संबंध में हम निरंतर जन जागरण कर रहे हैं। परिवार से लेकर दुनिया तक के अपने-अपने संविधान हों और सभी संविधान एक-दूसरे के साथ संतुलन बनाएँ। विश्व संविधान होगा, विश्व की एक व्यवस्था भी होगी और उस स्थिति में विश्व युद्ध का खतरा भी टल जाएगा। सेना भी नहीं रखनी पड़ेगी, बम भी नहीं बनाने होंगे और हम अधिक तेजी से विकास कर सकेंगे। हम यह चाहते हैं कि एक ऐसी दुनिया में जन जागृति हो, जिस जागृति के आधार पर विश्व का एक संविधान बन जाए और विश्व की एक सुरक्षा गारंटी व्यवस्था बन जाए। हम विश्व संविधान की कल्पना परिवार के संविधान से शुरू कर रहे हैं। परिवार का एक संविधान होगा, गाँव का एक संविधान होगा, देश का एक संविधान होगा और विश्व का भी एक संविधान होगा। हम इस दिशा में भी लगातार प्रयास कर रहे हैं।