लोकव्यवस्था जागरण अभियान: नए विकल्प की ओर एक कदम
16 जुलाई प्रातःकालीन सत्र। हम लोगों की संस्था दो दिशाओं में एक साथ कार्य कर रही है। एक दिशा है व्यवस्था परिवर्तन और दूसरी दिशा है वर्तमान व्यवस्था में सुधार। ये दोनों कार्य अलग-अलग हैं, लेकिन हम लोग दोनों को एक साथ लेकर चल रहे हैं।
स्पष्ट है कि हम व्यवस्था परिवर्तन के लिए सिर्फ एक काम कर रहे हैं कि वर्तमान लोकतंत्र को लोक स्वराज में बदला जाए। इसके लिए सबसे पहले संविधान को तंत्र-मुक्त करने की योजना बनी। हम इसी को व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत मान रहे हैं। यदि संविधान बनाने का अंतिम अधिकार तंत्र के हाथ से निकलकर किसी अन्य इकाई के पास हो जाए, तो हम व्यवस्था परिवर्तन की शुरुआत मान लेंगे।
इसके साथ-साथ हम व्यवस्था में सुधार के लिए जनजागरण भी करते रहेंगे। इसका मतलब यह है कि हम आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक, संवैधानिक, सामाजिक—सभी प्रकार की व्यवस्थाओं पर लगातार चर्चा करके उनमें क्या सुधार हो सकता है, क्या बदलाव हो सकता है, इस तरह के सुझाव समाज में देंगे।
इस तरह हम व्यवस्था में सुधार और व्यवस्था परिवर्तन, दोनों को एक साथ जोड़कर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।
व्यवस्था में सुधार के लिए हम लोग प्रतिदिन रात 7:30 बजे से 9:00 बजे तक देशभर के लोगों के साथ ज़ूम पर जुड़कर अलग-अलग विषयों पर चर्चा करते हैं और यह चर्चा लगभग 3 वर्षों से प्रतिदिन चल रही है।
दूसरी ओर, व्यवस्था परिवर्तन के लिए लोकव्यवस्था जागरण अभियान शुरू किया गया है और उसके लिए देशभर में यात्राएँ करके एक टीम बनाई जा रही है, जो संविधान को तंत्र की गुलामी से मुक्त करने की दिशा में योजना बनाए।
इस तरह हम वर्तमान व्यवस्था के एक नए विकल्प की योजना बना रहे हैं।
आप यदि इस कार्य से आंशिक रूप से भी जुड़ना चाहते हैं, तो आप ढाई सौ रुपये वार्षिक का दान देकर ज्ञान तत्त्व पाक्षिक पत्रिका के ग्राहक बन सकते हैं। आपको सारी जानकारियाँ हर 15 दिन में घर बैठे प्राप्त होती रहेंगी।
Comments