रंगा रेड्डी की घटना ने न्यायिक प्रणाली पर खड़े किए बड़े प्रश्न

तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले में एक व्यक्ति जेल से जमानत पर छूटा। उसने जमानत पर छूटने के बाद 6 लोगों की हत्याएँ कर दीं, जिनमें तीन उसके परिवार के लोग हैं और तीन अन्य लोग। यह एक प्रश्न खड़ा होता है कि इन हत्याओं के लिए न्यायपालिका कितनी जिम्मेदार है, क्योंकि न्यायपालिका की अनुमति से ही उस व्यक्ति को जमानत पर छोड़ा गया था।

मैं बार-बार लिखता रहा हूँ कि किसी भी व्यक्ति को जेल से छोड़ते समय अथवा रिहा करते समय भी किसी जिम्मेदार जमानतदार की गारंटी पर ही छोड़ा जाना चाहिए। यदि आज किसी की गारंटी पर छोड़ा जाता, तो इस तरह की दुर्घटना से बचा भी जा सकता था। स्पष्ट है कि हमारी न्याय प्रणाली में दोष है।

मेरे विचार से किसी व्यक्ति को जमानत देते समय परिवार की या जिम्मेदार लोगों की गारंटी होनी चाहिए। इस मामले में सारे प्रमाण मौजूद हैं। अपराधी हत्या की घटना को स्वीकार कर रहा है। इसके बाद भी न्यायालय में प्रस्तुत करके पुलिस को प्रमाण देना पड़ेगा, जबकि अपराधी स्वयं स्वीकार कर रहा है।

कैसा है हमारा न्यायालय, कैसी है हमारी न्याय व्यवस्था, कैसा है हमारा कानून। मेरे विचार से पूरी न्यायिक प्रणाली को बदलाव करने की जरूरत है।