मोदी सरकार की नेहरू परिवार के प्रति नीति पर उठते सवाल
मैं छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में रहता हूं। मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि नरेंद्र मोदी सरकार नेहरू परिवार के प्रति बहुत ही नरम दृष्टिकोण रखती है। देश के किसी अन्य राजनेता के प्रति मोदी सरकार उतनी सहनशील नहीं है, जितनी नेहरू परिवार के प्रति। जिस तरह राहुल गांधी दिन-रात गंदी भाषा बोलते हैं, नरेंद्र मोदी, अमित शाह अथवा संघ को अपमानित करते रहते हैं, इसके बाद भी मोदी सरकार के सभी नेता इस मामले में नेहरू परिवार को पूरी-पूरी मदद देते हैं। यह आश्चर्यजनक है, अन्यथा अब तक कब का जेल में डाल दिया जाता। कारण क्या है, यह पता नहीं है।
क्योंकि मैंने स्वयं अनुभव किया है कि रायपुर में कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को 3 वर्ष पहले ही भाग जाने में सरकार की भूमिका थी। दुनिया जानती है कि रामगोपाल अग्रवाल ने भ्रष्टाचार के कई सौ करोड़ रुपए कांग्रेस पार्टी को भेजे। सारे प्रमाण मौजूद हैं, फिर भी आज तक कभी न रामगोपाल अग्रवाल से खुलकर पूछताछ हुई और न कोई कार्यवाही हुई। यहां तक कि अब 3 वर्ष फरार रहने के बाद रामगोपाल अग्रवाल स्वयं सब सच बताने को तैयार हैं, लेकिन भारत सरकार नेहरू परिवार पर कार्यवाही करने से बचना चाहती है।
मुझे ऐसा संदेह है कि भारत सरकार राहुल गांधी की मूर्खता का उपयोग कर रही है और अरविंद केजरीवाल को किनारे लगाने के लिए ही राहुल गांधी की सारी गालियां सरकार बर्दाश्त कर रही है। जिस तरह अरविंद केजरीवाल को जेल में डाला गया, उस तरह अब तक नेहरू परिवार के कई लोग, यहां तक कि वाड्रा भी, इस तरह खुलेआम नहीं दिखते। इसलिए ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह मिलकर कोई बहुत दूरदर्शी योजना पर काम कर रहे हैं।
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