प्रशासनिक विकेंद्रीकरण से क्षेत्रवाद और भाषावाद के विवादों में कमी

1 अक्टूबर प्रातःकालीन सत्र। हम नई प्रशासनिक व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव करेंगे। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह करेंगे कि पूरे देश को 100 प्रदेशों में बाँटा जाएगा। हर प्रदेश में 100 जिले होंगे, हर जिले में 100 गाँव होंगे और हर गाँव की आबादी औसतन 1400 के आसपास रखी जाएगी। इस तरह हम एक प्रदेश की आबादी को लगभग डेढ़ करोड़ के आसपास मानकर चलेंगे।

इस व्यवस्था से प्रशासन मजबूत होगा, क्षेत्रवाद और भाषावाद के झगड़े कम हो जाएँगे, सत्ता का विकेंद्रीकरण हो जाएगा और खर्चा भी घट जाएगा। जो लोग मानते हैं कि इस व्यवस्था से खर्च बढ़ेगा, वे गलत हैं।

अगर हम हर विकासखंड को एक जिला मान लेंगे और हर कमिश्नरी को एक प्रदेश मान लेंगे, तो इससे कोई खर्च बढ़ने वाला नहीं है। खर्च बढ़ने की बात कहना पूरी तरह गलत है। वर्तमान समय में एक जिले का कलेक्टर पाँच गाड़ियाँ रखता है। बाद में जब वह एक ब्लॉक का कलेक्टर बनेगा, तो मोटरसाइकिल से भी काम चला लेगा। उसे ज्यादा दिक्कत नहीं आएगी। इसलिए इस विकेंद्रित सत्ता व्यवस्था पर भी सोचा जाना चाहिए।