नवजात को असुरक्षित छोड़ने पर मां को दंडित करने की व्यवस्था कितनी उचित?
खबर है कि राजस्थान में किसी परिवार को बच्चा नहीं चाहिए था, लेकिन उस परिवार में ही नए बच्चे का जन्म हुआ। परिवार ने ही अस्पताल में नर्स के साथ मिलकर योजना बनाई और उस बच्चे को बेच दिया। दो खरीददार होने के कारण दोनों के बीच नीलामी हुई और जिसने अधिक पैसा दिया, वह बच्चे को ले गया। बीच-बचाव में नर्स को भी कुछ कमाई हो गई। पुलिस बच्चा बेचने वाले, बच्चा खरीदने वाले और बीच-बचाव करने वालों को, सबको गिरफ्तार कर रही है, क्योंकि पुलिस के अनुसार बहुत बड़ा अपराध हो गया है।
एक दूसरी घटना हमारे सरगुजा जिले के दरिमा में घटी, जहाँ एक अविवाहित बच्ची ने किसी छोटी बच्ची को जन्म दे दिया। उसने उस बच्ची को कपड़े में लपेटकर बाहर खुले में छोड़ दिया। सवेरे उस बच्ची को देखा गया और उस बच्ची को अनाथालय में भर्ती कर दिया गया। अब पुलिस उस बच्ची को जन्म देने वाली माँ को खोज रही है। उस माँ को गिरफ्तार किया जाएगा। यदि वह माँ 18 वर्ष से कम की होगी, तो उस बच्ची के पिता को भी खोजा जाएगा। उस माँ और पिता को दंडित किया जाएगा, क्योंकि कानून यही कहता है।
अगर कोई अपने बच्चों को सुरक्षित रखकर बेच दे, तो कानून उसे दंडित करता है। कोई अगर अपने बच्चे को बेचने की अपेक्षा सुरक्षित बाहर में छोड़ दे, तो कानून उसे दंडित करता है। पता नहीं, यह कानून बनाने वाले कैसे-कैसे नासमझ या नशे में कानून बनाते थे। मैं नहीं समझता कि इन दोनों कार्यों में किसी प्रकार का अपराध कैसे हो गया। किसी ने बच्चा बेचा, किसी ने खरीदा, इससे सरकार का क्या लेना-देना है? हो सकता है, सरकार का टैक्स का नुकसान हुआ हो, तो वह उतने टैक्स की भरपाई कर सकता है। अन्यथा कोई नुकसान नहीं हुआ। किसी ने अपने बच्चे को बाहर छोड़ दिया, इससे किसी का क्या नुकसान हुआ?
इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण कानून को हटा लेना चाहिए। कानून बनाने वाले तो इस तरह का कानून बना रहे हैं, जैसे कि वे हर आदमी के मालिक हों और न परिवार का कोई अधिकार है, न समाज का कोई अधिकार है। परिवार और समाज तो सिर्फ अपना कर्तव्य करने के लिए हैं। अधिकारों का ठेका तो इन नासमझ नेताओं ने उठा लिया है।
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