श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और ईरान जैसे देशों के हालिया उदाहरण हमारे सामने हैं।
मुझे यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई है कि वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था अपूर्ण है और तानाशाही का प्रभावी रूप से सामना करने में असमर्थ है। तानाशाही किसी भी समाज के लिए सबसे अधिक घातक व्यवस्था है, और इसे समाप्त करने के लिए एक संशोधित लोकतंत्र—अर्थात लोक स्वराज—की नितांत आवश्यकता है। यदि हम गंभीरता से विचार करें तो पाएँगे कि आज विश्व में परिस्थितियाँ किस दिशा में जा रही हैं।
यदि कोई सरकार मनमाने ढंग से कार्य करने लगे, तो उसे हटाने का वास्तविक लोकतांत्रिक तरीका क्या है? यदि जनता संविधान में कोई संशोधन करना चाहती है, तो उसके लिए जनता के पास कौन-सा प्रभावी मार्ग उपलब्ध है? वर्तमान संवैधानिक व्यवस्था इन प्रश्नों के उत्तर देने में पूरी तरह असफल और दोषपूर्ण प्रतीत होती है।
श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश और ईरान जैसे देशों के हालिया उदाहरण हमारे सामने हैं। जब भी किसी मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता होती है, तो जनता के सामने केवल दो ही विकल्प बचते हैं—या तो गोलियाँ खानी पड़ती हैं या गोलियाँ चलानी पड़ती हैं। इसके अतिरिक्त जनता के पास न तो संविधान में परिवर्तन का कोई शांतिपूर्ण और प्रभावी साधन है और न ही किसी राजनीतिक सत्ता को समय रहते हटाने का।
इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए आवश्यक है कि दुनिया एक संशोधित लोकतंत्र की ओर बढ़े। इसी दिशा में हम लोगों ने मिलकर लंबे समय तक गंभीर चिंतन किया है और अब हम विश्व के समक्ष लोक स्वराज का प्रस्ताव प्रस्तुत कर रहे हैं। इसके माध्यम से वर्तमान विकृत लोकतंत्र के स्थान पर एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित की जा सकेगी, जो तानाशाही का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम होगी और जनता को वास्तविक सत्ता प्रदान करेगी।
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