इंदिरा गांधी की हत्या एक क्रिया थी और उसके बाद सिखों का नरसंहार उसकी प्रतिक्रिया था।
27 जनवरी, प्रातःकालीन सत्र
दुनिया में क्रिया की प्रतिक्रिया अवश्य होती है। क्रिया सामान्यतः सोच-समझकर, योजना के अनुसार की जाती है, जबकि प्रतिक्रिया तात्कालिक और अल्पकालिक होती है। इंदिरा गांधी की हत्या एक क्रिया थी और उसके बाद सिखों का नरसंहार उसकी प्रतिक्रिया था। गोधरा में रेल डिब्बे का जलाया जाना एक क्रिया थी और उसके बाद जो नरसंहार शुरू हुआ, वह प्रतिक्रिया थी।
लेकिन यदि किसी क्रिया के विरुद्ध बहुत लंबे समय तक सोच-समझकर और योजनाबद्ध ढंग से कोई प्रतिक्रिया की जाती है, तो वह प्रतिक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि स्वयं एक नई क्रिया बन जाती है।
मैं मानता हूँ कि प्रतिक्रिया स्वाभाविक होती है, लेकिन प्रतिक्रिया का होना भी कोई अच्छी स्थिति नहीं है, क्योंकि यदि किसी क्रिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया होती है, तो उस प्रतिक्रिया के विरुद्ध भविष्य में फिर कोई नई क्रिया हो सकती है। इस प्रकार क्रिया और प्रतिक्रिया का यह क्रम चलता रहता है, जो समाज के लिए हितकारी नहीं है।
इसीलिए हम नई व्यवस्था में यह सोच रहे हैं कि यदि कोई क्रिया घटित होती है, तो तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप हो। न्यायपालिका प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा न करे, बल्कि तुरंत निर्णय दे। यदि प्रशासन और न्यायपालिका ऐसे मामलों में अत्यंत शीघ्र और प्रभावी निर्णय दें, तो प्रतिक्रियाएँ स्वाभाविक रूप से रुक सकती हैं।
हम इसी प्रकार का बदलाव लाने की दिशा में विचार कर रहे हैं।
Comments