नई समाज व्यवस्था में भारत राज्यों का संघ नहीं, बल्कि परिवारों का संघ होगा।

4 फरवरी – प्रातःकालीन सत्र
नई समाज व्यवस्था में भारत राज्यों का संघ नहीं, बल्कि परिवारों का संघ होगा। भारत में कर प्रणाली पूरी तरह भिन्न होगी। सरकार केवल एक ही होगी—केंद्र सरकार; इसके अतिरिक्त कोई अन्य सरकार नहीं होगी।
केंद्र सरकार केवल एक कर लगाएगी, और वह होगा संपत्ति कर। यह संपत्ति कर प्रत्येक परिवार की कुल संपत्ति पर वार्षिक दो प्रतिशत से कम होगा—किसी भी स्थिति में इससे अधिक नहीं। इस व्यवस्था के लागू होते ही सभी प्रकार के अन्य कर पूर्णतः समाप्त कर दिए जाएंगे। बाज़ार को पूरी तरह स्वतंत्र किया जाएगा। सरकार का बाज़ार में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं होगा। सरकार का दायित्व केवल सुरक्षा और न्याय तक सीमित रहेगा, और सरकारी बजट का उपयोग भी केवल इन्हीं दो उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। वर्तमान समय में सरकारें मनमाने ढंग से कर लगाती हैं और मनमाने ढंग से खर्च करती हैं, जिसके कारण धन का व्यापक दुरुपयोग होता है। इस नई व्यवस्था में इस प्रवृत्ति को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।