मैंने महिला सशक्तिकरण और युवा सशक्तिकरण के नारे को एक बड़ी समस्या बताया था।

6 जनवरी प्रातःकालीन सत्र

मैंने महिला सशक्तिकरण और युवा सशक्तिकरण के नारे को एक बड़ी समस्या बताया था। मेरे विचार से केवल दो ही वर्ग होने चाहिए—एक अच्छे लोगों का और दूसरा बुरे लोगों का। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार का वर्ग विभाजन उचित नहीं है।

मेरा यह मानना है कि क्षेत्रीयता भी एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। पूरे देश को प्रांतों में बाँटकर हम आपस में ही टकरा रहे हैं। क्षेत्रवाद की भावना लगातार मजबूत हो रही है। बंगाली, मराठी, दक्षिण भारतीय, उत्तर भारतीय जैसे न जाने कितने शब्द प्रचलन में आ गए हैं।

क्षेत्रवाद को समाप्त किया जाना चाहिए और यह कार्य बहुत कठिन भी नहीं है।

मेरा सुझाव है कि पूरे देश को 100 भागों में बाँट दिया जाए। एक प्रदेश की औसत जनसंख्या लगभग डेढ़ करोड़ होनी चाहिए। इस प्रकार उत्तर प्रदेश के 16 भाग हो जाएंगे, उत्तराखंड का एक ही भाग रहेगा और छत्तीसगढ़ के दो भाग हो जाएंगे। इससे क्षेत्रीयता लगभग समाप्त हो जाएगी।

मैंने यहाँ “औसत” शब्द का प्रयोग किया है। इसका अर्थ यह है कि किसी प्रदेश की जनसंख्या एक करोड़ भी हो सकती है और किसी की दो करोड़ भी, लेकिन कुल विभाजन 100 भागों में ही किया जाएगा—इस बात का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।