ईरान-अमेरिका टकराव: वैश्विक शक्ति संतुलन की राजनीति

ईरान-अमेरिका टकराव का कारण बिल्कुल साफ है। वर्तमान दुनिया में दो समानांतर शक्तियाँ ऐसी हैं जो एक-दूसरे से टकराने की क्षमता रखती हैं। इनमें एक है नाटो और दूसरा है कम्युनिस्ट संगठन। ये दोनों ही लगभग समान रूप से शक्तिशाली माने जाते हैं—आर्थिक दृष्टि से भी और सामरिक दृष्टि से भी।
इस्लामी शक्ति आबादी के आधार पर तो समकक्ष है, लेकिन आर्थिक और सामरिक आधार पर इस्लामी दुनिया एकजुट नहीं है। वह शिया-सुन्नी में बंटी हुई है और समय-समय पर अमेरिका या चीन के अनुसार अपनी सोच में फेरबदल करती रहती है।
चौथी शक्ति भारत है, जो आबादी की दृष्टि से तो लगभग समकक्ष है, लेकिन सामरिक दृष्टि से इन दोनों शक्तियों से कमजोर है। आर्थिक मामलों में भारत लगातार शक्तिशाली होता जा रहा है, फिर भी अभी वह इन दोनों से कमजोर है। भारत कभी इन दोनों शक्तियों को चुनौती नहीं देता, बल्कि तालमेल बनाकर रखता है।
लेकिन ईरान पश्चिम के लिए एक चुनौती बनता जा रहा था। ईरान शक्ति के मामले में चौथी शक्ति बनने की तैयारी कर रहा था। यह बात अमेरिका को पसंद नहीं थी। अमेरिका नहीं चाहता था कि ईरान मुस्लिम देशों का नेता बने अथवा वह परमाणु-संपन्न देश बन जाए, क्योंकि परमाणु-संपन्न बनने के बाद वह चौथी महाशक्ति बनने की इच्छा रख सकता था।
स्पष्ट है कि यदि किसी परिस्थिति में ईरान और कम्युनिस्ट शक्तियाँ एक हो जाते, तो अमेरिका के लिए संकट पैदा हो सकता था, क्योंकि भारत हमेशा बीच में ही रहता है। अमेरिका इस बात को जानता है कि भारत कभी किसी के लिए संकट नहीं बनेगा, भले ही वह तीसरी शक्ति के रूप में बीच-बीच में पंच की भूमिका में बना रहे। लेकिन ईरान के विषय में यह नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ईरान अकेला नहीं रहेगा; वह गुट बनाने का प्रयास अवश्य करेगा।
एक बात यह भी है कि ईरान की संस्कृति मुस्लिम है, जिसे कई लोग आक्रामक मानते हैं, जबकि भारत की संस्कृति हिंदू है, जिसे शांतिप्रिय माना जाता है।
यही कारण है कि अमेरिका ने सारी सीमाएँ तोड़कर ईरान पर आक्रमण किया। अमेरिका जानता है कि इस आक्रमण से उसे गंभीर नुकसान हो सकता है, लेकिन वह यह भी जानता है कि यदि अभी ईरान को नहीं रोका गया, तो कुछ महीनों के बाद ईरान को रोकना असंभव हो जाएगा और वह अमेरिका के लिए स्थायी खतरा बन सकता है। इसलिए अमेरिका ने इतना बड़ा जोखिम उठाने का निर्णय लिया है। अमेरिका ने जो निर्णय किया है, वह वर्तमान स्थिति के अनुसार उसे उचित प्रतीत होता है।