ईरान-अमेरिका तनाव: बिना निर्णायक युद्ध के बदलते वैश्विक समीकरण

ईरान-अमेरिका की लड़ाई अभी रुक गई है। कौन जीता, कौन हारा—इसका कोई स्पष्ट निर्णय संभव नहीं है, क्योंकि वास्तव में हार-जीत की लड़ाई शुरू ही नहीं हुई थी। हार-जीत तो तब होती है जब पैदल सेना घुसती है; अन्यथा हवाई आक्रमण में तो सिर्फ नुकसान ही होता है, कोई स्पष्ट हार-जीत नहीं होती।

फिर भी, युद्धविराम होने के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप एक अबूझ पहेली बने हुए हैं। वे योजना बनाकर निर्णय करते हैं अथवा पागलपन में—यह बात निश्चित रूप से नहीं कही जा सकती, क्योंकि अब तक कोई साफ निष्कर्ष सामने नहीं आया है। लेकिन एक बात जरूर है कि ट्रंप ने पूरी दुनिया के समीकरण बदल दिए हैं। दूसरी बात यह है कि ट्रंप ने अमेरिका की विश्वसनीयता को काफी हद तक प्रभावित किया है। अमेरिका को एक गंभीर शासन माना जाता था, लेकिन अनावश्यक और अतिरंजित बयान देकर ट्रंप ने उस गंभीरता को क्षति पहुँचाई है। यह ट्रंप की एक बुरी आदत मानी जाती है, जिसे अमेरिका की जनता भी गंभीरता से देख रही है।

अभी हम इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाल सकते, क्योंकि ईरान पर अमेरिका के आक्रमण से दुनिया को कई संकेत मिले हैं। पहली बात यह कही जा रही है कि ईरान के कुछ खतरनाक नेता मारे गए हैं। खामनेई एक शक्तिशाली शासक के रूप में उभर रहे थे—ऐसी बातें कही जा रही हैं, हालांकि इसकी पुष्टि आवश्यक है। वर्तमान समय में ईरान में एक प्रकार का आंतरिक सत्ता-संघर्ष भी देखने को मिल रहा है।

खामनेई के समर्थक और सेना के लोग वहाँ के निर्वाचित राष्ट्रपति और अन्य समूहों पर बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर राष्ट्रपति और अन्य लोकतांत्रिक नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलने की बात कही जाती है।

मेरे विचार से, कुछ लोग यह मानते हैं कि ट्रंप को इस स्थिति में एक तरह की बढ़त मिली है, क्योंकि उन्होंने ईरान की आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया है। वहीं, कुछ का मानना है कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता भी बढ़ी है।

अमेरिका, इज़रायल और ईरान से जुड़ी स्थिति को लेकर पूरी दुनिया गंभीरता से विचार कर रही है, और ऐसा प्रतीत होता है कि वैश्विक स्तर पर एक तीसरा दृष्टिकोण या नया शक्ति-संतुलन भी उभर रहा है।