युद्ध का संकट नहीं, आत्मनिर्भर भारत का अवसर''

अमेरिका–ईरान युद्ध से सारी दुनिया परेशान है। सारी दुनिया यह चाहती है कि किसी तरह युद्ध बंद हो जाए और तेल का आवागमन सुलभ हो जाए। भारत भी तात्कालिक रूप से यही चाहता है, लेकिन हम इसका दीर्घकालिक समाधान चाहते हैं। हम इस संकट को एक अवसर में बदलना चाहते हैं।

अवसर में बदलने के लिए सिर्फ एक काम करना होगा कि हम भारत के लोगों को 10% तेल की खपत घटानी होगी। यदि हम 10% तेल की खपत कम कर दें, तो हम बहुत आरामदेह स्थिति में हो जाएंगे। हमें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए और उसका अंतिम निर्णय हमारे हाथ में है कि हम तेल और गैस की खपत कम करें।

तेल की खपत तीन दिशाओं में होती है—एक अनिवार्य आवश्यकता, एक सुविधा की आवश्यकता, और एक विलासिता की आवश्यकता। हम अनिवार्य आवश्यकताओं में तेल की खपत कम नहीं कर सकते। सुविधा की आवश्यकताओं में हम एक-दो प्रतिशत बचा सकते हैं, लेकिन विलासिता की आवश्यकताओं में हम बड़ी मात्रा में कटौती कर सकते हैं।

आत्मनिर्भरता ही हमारे समाधान का सबसे अच्छा मार्ग है। इसलिए हम भारत के लोग सरकार के साथ मिलकर इस युद्ध को एक संकट के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में बदलने का प्रयास करें।