अपराध की वास्तविक परिभाषा:स्वतंत्रता का विनाश

15 अप्रैल प्रातःकालीन सत्र। अपराध नियंत्रण की गारंटी पर चर्चा।

सारी दुनिया में अपराध की एक गलत परिभाषा बनी हुई है। आमतौर पर लोग यह जानते ही नहीं हैं कि अपराध क्या है, गैरकानूनी क्या है और अनैतिक क्या है। अपराध सिर्फ एक कार्य होता है—किसी अन्य व्यक्ति की स्वतंत्रता का यदि अतिक्रमण किया जाता है, वही अतिक्रमण अपराध होता है। कोई अन्य कार्य अपराध नहीं होता।

अपराध दो प्रकार से हो सकते हैं—या तो बल प्रयोग हो या जालसाजी/धोखाधड़ी हो। अपराधों का कोई तीसरा प्रकार नहीं होता। अपराध के कुल पाँच भाग किए जा सकते हैं—पहला, चोरी, डकैती, लूट; दूसरा, बलात्कार; तीसरा, मिलावट, कम तौल; चौथा, जालसाजी, धोखाधड़ी; पाँचवाँ, हिंसा और आतंक। इन पाँच को छोड़कर कोई छठा कार्य किसी भी परिस्थिति में अपराध होता ही नहीं है।

ऐसी स्थिति में हमारी सरकार यह गारंटी देगी कि ये पाँच प्रकार के अपराध नहीं होंगे। यह हमारी गारंटी है कि भारत के प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित रहेगी। यदि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता में कोई बाधा पैदा होगी, तो उसका मुआवजा भी सरकार देगी और उसे रोकने का भी प्रयास करेगी।

स्वतंत्रता की सुरक्षा व्यक्ति को स्वयं करनी है या अपनी सुरक्षा समाज के माध्यम से होगी। समाज व्यक्ति की सुरक्षा की गारंटी देगा, लेकिन राज्य उसे सुरक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि राज्य किसी भी व्यक्ति को सीधे सुरक्षा नहीं देगा; सुरक्षा तो समाज देगा, लेकिन राज्य उसमें आने वाली बाधाओं को दूर करेगा, अर्थात अपराधों को नियंत्रित करेगा।

यह एक महत्वपूर्ण फर्क है। वर्तमान दुनिया को यह परिभाषा समझनी चाहिए और इस पर चर्चा करनी चाहिए।