अमेरिका से आई “तिलचट्टा राजनीति” और भारत की हलचल

पिछला सप्ताह हम सबके लिए एक ऐतिहासिक यादगार बन गया है। उस सप्ताह में अमेरिका से एक “तिलचट्टा वाली बीमारी” शुरू हुई थी और दो-तीन दिनों में ही भारत के घर-घर में तिलचट्टे पैदा हो गए थे।

देश की सभी संवैधानिक संस्थाएं इन तिलचट्टों के जन्म से चिंतित हो गई थीं। Supreme Court of India भी इस विषय पर चर्चा करने लग गया था। अखबार और टीवी इस तिलचट्टे की चर्चा से भरे पड़े थे। “जैन जी” एक ऐसा शब्द बन गया था, जो चिंता का आधार हो गया था।

बड़े-बड़े विपक्षी नेता भी मैदान में उछलने लगे थे। Yogendra Yadav, जो बंगाल चुनाव के बाद घायल थे, उनके शरीर में भी बहुत खून बढ़ गया था। वे भी “जैन जी, जैन जी” चिल्लाने लग गए थे।

भारत की आम जनता “जैन जी” शब्द का अर्थ नहीं समझती थी, लेकिन ये बूढ़े शेर सिर्फ “जैन जी” ही चिल्ला रहे थे।

लेकिन उससे भी बड़ा आश्चर्य हुआ कि पता नहीं कहां से कौन-सी ऐसी बरसात हुई कि सारे देशभर में छाए हुए तिलचट्टे एकाएक अदृश्य हो गए। पता नहीं अमेरिका चले गए या कहां चले गए, लेकिन अब “जैन जी” दिख नहीं रहे हैं। अब सभी संवैधानिक संस्थाएं पहले की तरह काम कर रही हैं।

एक सप्ताह में ही इतना बड़ा बदलाव हम लोगों के लिए तो ऐतिहासिक घटना ही माना जाएगा, क्योंकि हमने अपने पूरे जीवन में न कोई तिलचट्टों की बीमारी सुनी थी और न “जैन जी” जैसा शब्द भारत में सुना गया था।

यह अमेरिका से आने वाली बीमारियां अमेरिका में ही रहें, तो ज्यादा अच्छी हैं।