नई राजनीतिक व्यवस्था में नागरिक आचरण का महत्व

29 में प्रातःकालीन सत्र

नई राजनीतिक व्यवस्था में समान नागरिक संहिता होगी। व्यक्ति एक इकाई होगा। धर्म, जाति, भाषा के आधार पर या महिला-पुरुष के आधार पर कानून में कोई भेदभाव नहीं होगा।

लेकिन समाज व्यवस्था में हिंदू और मुसलमान के बीच कुछ अंतर कायम रहेगा। आमतौर पर मुस्लिम संस्कृति को संगठन-प्रधान और कट्टर माना जाता है। वह हर समय मरने-मारने को तैयार रहते हैं, जिसे हम आम हिंदू पसंद नहीं करते। ऐसी स्थिति में आम हिंदुओं का मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, इस संबंध में भी हम सामाजिक चिंतन करते रहते हैं।

हमारे विचार में हम इन सबको चार भागों में बाँट सकते हैं। जो कट्टरवादी मुसलमान हैं और क्रिया में भी सक्रिय हैं, संगठित हैं, आंदोलनरत हैं, हिंसक हैं, इस प्रकार के लोगों को बहुत अधिक कठोर दंड देने की जरूरत है। लेकिन जो कट्टर हिंदू हैं, जो संगठित हैं, हिंसा पर विश्वास करते हैं, उस प्रकार के लोगों को भी दंड देना आवश्यक है, भले ही वह कट्टरवादी मुसलमानों की तुलना में कम क्यों न हो।

इसी तरह जो शांतिप्रिय मुसलमान हैं, उन मुसलमानों के साथ हम अच्छे संबंध बना सकते हैं, लेकिन हम उनसे सावधान रहेंगे, क्योंकि वे सांस्कृतिक धरातल पर कट्टर हैं और व्यवहार में ही शांतिप्रिय हैं। इसलिए हम सावधान रहेंगे।

लेकिन जो शांतिप्रिय हिंदू हैं, हम उनके साथ पूरी तरह इकट्ठा होकर, विश्वासपूर्वक संबंध बना सकते हैं। इस तरह हम हिंदू और मुसलमान के बीच व्यावहारिक विभाजन कर सकते हैं।

लेकिन हम इस बात की पूरी सावधानी रखेंगे कि किसी भी परिस्थिति में किसी शांतिप्रिय मुसलमान को कोई कट्टरवादी हिंदू परेशान न कर सके। सिर्फ कट्टरवादी मुसलमान को परेशान करने के मामले में ही हम कट्टरवादी हिंदुओं का उपयोग कर सकते हैं।

इसका अर्थ यह है कि समाज व्यवस्था पर शांतिप्रिय हिंदुओं का निर्णायक प्रभाव होगा, कट्टरवादी हिंदुओं का नहीं। दूसरी बात यह है कि शांतिप्रिय मुसलमान को हम कट्टरवादी हिंदुओं की तुलना में अच्छा समझेंगे।