सामाजिक एकता का आह्वान: लोक व्यवस्था जागरण अभियान की ओर एक निर्णायक कदम
25 जून प्रातःकालीन सत्र
हम अच्छी तरह समझते हैं कि दुनिया का हर नेता सामाजिक एकता को सबसे बड़ा खतरा समझता है। लंबे समय से नेताओं ने सामाजिक एकता को तोड़ने के लिए अनेक तरह के कानून भी बनाए, प्रचार भी किया, और राजनेताओं के प्रचार से प्रभावित होकर ही सामाजिक एकता सारी दुनिया में तार-तार हो गई। कहीं धर्म के नाम पर, कहीं जाति के नाम पर, कहीं लिंग के नाम पर और कहीं गरीब-अमीर के नाम पर किसी न किसी रूप में सामाजिक एकता को कमजोर किया गया।
सामाजिक एकता के मामले में स्वामी दयानंद का आर्य समाज, गांधी का सर्वोदय, श्रीराम शर्मा का गायत्री परिवार और हम लोगों का मां संस्थान पूरी तरह सक्रिय हैं। वर्तमान समय में तो संघ परिवार और मोहन भागवत भी सामाजिक एकता के मामले में सबसे आगे चल रहे हैं।
ऐसी परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि हम सब मिलकर जातिवाद, सांप्रदायिक संगठन, महिला तुष्टिकरण जैसे सभी संगठनों का सामाजिक बहिष्कार करें। हम जानते हैं कि हर राजनेता या हर अपराधी इस प्रकार के जातीय और धार्मिक संगठनों का सहारा लेते हैं और वर्तमान समय में भी आप लगातार देख रहे होंगे कि अपराधी तत्व और राजनेता ही इस तरह के संगठन बनाने में सबसे आगे रहते हैं।
इसलिए हम सब लोगों का यह कर्तव्य भी है और दायित्व भी कि हम सब लोग मिलकर सामाजिक एकता को संगठित करें। अगर समाज संगठित हो जाएगा, तो ये सब कमजोर पड़ जाएंगे।
इसी योजना के अंतर्गत हमारे सभी साथी मिलकर 25 और 26 जुलाई को अयोध्या में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। इस सम्मेलन का नाम "लोक व्यवस्था जागरण अभियान" रखा गया है। मैं चाहता हूं कि सामाजिक एकता के सभी पक्षधर इस दो-दिवसीय सम्मेलन में बैठकर भविष्य की योजना बनाएं। इस सम्मेलन में भाषणबाजी कम होगी, योजनाएं अधिक बनेंगी।
मैं इस सम्मेलन के माध्यम से समाज सशक्तिकरण के हर प्रयास का पूरा समर्थन और सहयोग करूंगा।
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